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Saturday, September 17, 2011

मत दो जीवन का वरदान....


सौगंधों के सूत्र बाँध कर
मत दो जीवन का वरदान
पतझर को पतझर रहने दो
मत दो सावन का वरदान............

अरी बावरी ! सुलग रहा हूँ
फूँको अब जल जाने दो
जल लहराया है नयनों में
मत पोंछो बह जाने दो.

तुम पारस मैं लौह अभागा
मत दो कंचन का वरदान.............

मेरे रोम-रोम में कंटक
वसन तुम्हारा बिंध जायेगा
कोमल तन की तुम शहजादी
रिश्ता कैसे निभ पायेगा.

मैं बबूल का सूखा पौधा
मत दो चंदन का वरदान...............

तुमसे रह कर विलग मीत मैं
मरुथल सा ही तृषित रहूंगा
तुम्हीं नहीं जब सुनने वाली
मैं मन पीड़ा किसे कहूंगा ?

मरुथल को मरुथल रहने दो
मत दो मधुबन का वरदान..........

पागल होकर गीत तुम्हारे
विजन घाटियों में गाऊंगा
रुदन करूंगा – चीखूंगा मैं
और भटक कर मर जाऊंगा.

क्रंदन मेरे भाग लिखा है
मत दो जीवन का वरदान..........

अरुण कुमार निगम
आदित्य नगर , दुर्ग
छत्तीसगढ़.
(रचना वर्ष- 1977)

22 comments:

  1. यह मत दो तुम, वो भी मत दो |
    आखिर क्या मांगे दीवाने ?

    मेरा प्यार नहीं क्यूँ मांगे--
    चाहे - बस - दर्दीले - गाने |

    तनिक शरारत थोडा नखरा
    थोड़ी मस्ती बुरा मानता -

    आखिर प्यार किसे कहते हैं--
    प्यार के आखिर क्या हैं माने ||

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  2. अरुण जी ,

    १९७७ का काव्य ... बहुत खूबसूरत ..हर पंक्ति से शाश्वत प्रेम की महक निकल रही है ... बहुत खूबसूरत रचना

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  3. अहा!
    सरस गेय गीत कम ही मिलते हैं
    दो बार गा चुका हूं
    फिर आऊंगा।

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  4. तुमसे रह कर विलग मीत मैं
    मरुथल सा ही तृषित रहूंगा
    तुम्हीं नहीं जब सुनने वाली
    मैं मन पीड़ा किसे कहूंगा ?

    वाह अरुण जी कविता का बेहतरीन नमूना लिखा है आपने . आप की काव्य यात्रा निरंतर हृदयिक हो शुभकामनाये.

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  5. मेरे रोम-रोम में कंटक
    वसन तुम्हारा बिंध जायेगा
    कोमल तन की तुम शहजादी
    रिश्ता कैसे निभ पायेगा

    बहुत ही सुंदर गीत का सृजन किया है आपने,
    बधाई निगम जी।

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  6. आपके इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा दिनांक 19-09-2011 को सोमवासरीय चर्चा मंच पर भी होगी। सूचनार्थ

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  7. राग और समर्पण के भावों से भरी इस सुन्दर रचना के लिए हार्दिक शुभकामनायें...

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  8. बढ़िया गीत है। कभी पुरानी नहीं लगेगी।

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  9. वाह! बहुत भाव प्रणव .... आनंद है अरुण भाई यह गीत...
    सादर बधाई...

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  10. वाह ....बहुत खूब लिखा है

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  11. पागल होकर गीत तुम्हारे
    विजन घाटियों में गाऊंगा
    रुदन करूंगा – चीखूंगा मैं
    और भटक कर मर जाऊंगा.

    क्रंदन मेरे भाग लिखा है
    मत दो जीवन का वरदान.......
    sunder geet
    badhai
    rachana

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  12. अरूण जी, शायद आपने ब्‍लॉग के लिए ज़रूरी चीजें अभी तक नहीं देखीं। यहाँ आपके काम की बहुत सारी चीजें हैं।

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  13. मैं बबूल का सूखा पौधा
    मत दो चंदन का वरदान..
    सशक्त रचना ,सम्प्रेश्निय्ता से भरपूर .जीवन की रागात्मकता से संसिक्त ,बिखेरती जीवन ऊर्जा .

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  14. bahut sunder prem ki bhavnaon main doobaa hua madhur geet .bahut badhaai aapko/
    आप ब्लोगर्स मीट वीकली (९) के मंच पर पर पधारें /और अपने विचारों से हमें अवगत कराइये/आप हमेशा अच्छी अच्छी रचनाएँ लिखतें रहें यही कामना है /
    आप ब्लोगर्स मीट वीकली के मंच पर सादर आमंत्रित हैं /

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  15. अरी बावरी ! सुलग रहा हूँ
    फूँको अब जल जाने दो
    जल लहराया है नयनों में
    मत पोंछो बह जाने दो.

    कविवर आप हमारे ब्लॉग तक आये और सराहा हम तो धन्य हुए ..
    आपके लेखन का कोई जवाब नहीं लाजवाब हर लिहाज से ..शब्द ,भाषा .रस ,सहजता ..चिंतन , विचार , मर्म .........क्या कहे ..सारगर्भित ,पुरमानी ..दाद हाज़िर है क़ुबूल करें

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  16. आपके ब्लॉग को यहां जोड़ा है
    1 ब्लॉग सबका
    कृपया फालोवर बनकर उत्साह वर्धन कीजिये

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  17. kitna pyaara...kitna puraana hokar bhi lagta hai jaise kitna nayaa hai....nayee khushboo, naya ehsaas..behtareen..

    Mere latest post ko yahan padhe:
    http://teri-galatfahmi.blogspot.com/2011/09/blog-post_19.html

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  18. बहुत ही मधुर गीत ... प्रेम और विरह की पीड़ा अनुपम दृश्य बनाया है आपने ... लाजवाब गीत ...

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