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Friday, September 9, 2011

गज़ल...

मौत ने आकर कहा है प्यार से
अब चलो उठो भी बज़्मेयार से.

उम्र का ये आखिरी पन्ना पढ़ो
जो लिखा है आँसुओँ की धार से.

अलविदा कह दो बहारों जरा
फूल अब चुभने लगे हैं खार से.

कुछ करो आराम साँसें रोक कर
पाँव घायल ज़िंदगी की मार से.

टूट जाना लाजमी उन फूलों का
लग रहे हैं जो यहाँ बीमार से.

सुबह के साथी ने फेंका किस तरह
पूछ लीजे शाम को अखबार से.

डूब जा खामोश होकर ऐ अरुण
दूर साहिल है बहुत मँझधार से.

अरुण कुमार निगम
आदित्य नगर , दुर्ग
छत्तीसगढ़.
(रचना वर्ष – 1980)

19 comments:

  1. सुबह के साथी ने फेंका किस तरह
    पूछ लीजे शाम को अखबार से.

    खुबसूरत अंदाज भाई जी ||
    बधाई ||

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  2. मौत ने आकर कहा है प्यार से
    अब चलो उठो भी बज़्मेयार से.

    बेहतरीन गजल है सर।

    सादर

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  3. मौत ने आकर कहा है प्यार से
    अब चलो उठो भी बज़्मेयार से.

    उम्र का ये आखिरी पन्ना पढ़ो
    जो लिखा है आँसुओँ की धार से.

    गज़ब की दिल मे उतरती गज़ल है…………शानदार लाजवाब्।

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  4. अलविदा कह दो बहारों जरा
    फूल अब चुभने लगे हैं खार से.

    कुछ करो आराम साँसें रोक कर
    पाँव घायल ज़िंदगी की मार से.

    बहुत खूबसूरत गज़ल ..

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  5. कुछ करो आराम साँसें रोक कर
    पाँव घायल ज़िंदगी की मार से.

    ... लाजवाब गज़ल। हरेक शेर मन को छू जाता है।

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  6. i dnt knw how to appraise...
    just to leave a mark dat i read it.. m commenting here.. :)

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  7. डूब जा खामोश होकर ऐ अरुण
    दूर साहिल है बहुत मँझधार से.
    --
    बढ़िया ग़ज़ल!
    मक्ता भी खूब है!

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  8. मौत ने आकर कहा है प्यार से
    अब चलो उठो भी बज़्मेयार से....बढ़िया ग़ज़ल!

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  9. उम्दा और लाजबाब गजल ..

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  10. उम्र का ये आखिरी पन्ना पढ़ो
    जो लिखा है आँसुओँ की धार से.
    bahut hi shandaar

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  11. वाह अरुण भाई... बहुत उम्दा...
    हर शेर पर वाह निकल जाता है...
    सादर बधाई...

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  12. कुछ करो आराम साँसें रोक कर
    पाँव घायल ज़िंदगी की मार से.

    लाजबाब गजल .

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  13. bahut umda ghazal likhi hai.har sher laajabaab hai.

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  14. लाजबाब गजल दिल मे उतरती

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  15. टूट जाना लाजमी उन फूलों का
    लग रहे हैं जो यहाँ बीमार से.

    सुबह के साथी ने फेंका किस तरह
    पूछ लीजे शाम को अखबार से.

    बेहतरीन ग़ज़ल .....

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  16. आपकी पोस्ट आज "ब्लोगर्स मीट वीकली" के मंच पर प्रस्तुत की गई है /आप आयें और अपने विचारों से हमें अवगत कराएँ /आप हमेशा ऐसे ही अच्छी और ज्ञान से भरपूर रचनाएँ लिखते रहें यही कामना है /आप ब्लोगर्स मीट वीकली (८)के मंच पर सादर आमंत्रित हैं /जरुर पधारें /

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  17. अलविदा कह दो बहारों जरा
    फूल अब चुभने लगे हैं खार से.


    -बहुत बढ़िया....

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