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Friday, September 7, 2012

मन को जरा टटोलो जी .......

स्वर में अमृत घोलो जी
फिर अधरों को खोलो जी |

नहीं खर्च कुछ होने का

मीठा – मीठा बोलो जी |.


देने वाला कैसे दे ?

हाथ मलिन हैं धो लो जी |


मन से पश्चाताप करो

प्रायश्चित कर रो लो जी |


नाव सम्हल ना पाएगी

इतना भी मत डोलो जी |


मान सहित घर पहुँचा दे

साथ उसी के हो लो जी |


जीवन में क्या दिया-लिया

मन को जरा टटोलो जी |


अधिक जागरण ठीक नहीं

चादर तानो सो लो जी |


अरुण कुमार निगम
आदित्य नगर , दुर्ग (छत्तीसगढ़)
विजय नगर, जबलपुर (म.प्र.)

22 comments:

  1. बहुत बढ़िया निगम साहब-
    दिल्ली की हवा रास आ रही है-
    पर---

    स्वर में अमृत घोला है |
    मीठा मीठा बोला है |
    अब मतलब की बात करेगा-
    टाँगे लम्बा झोला है ||


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  2. नाव सम्हल ना पाएगी
    इतना भी मत डोलो जी |
    सुझाव बहुत अच्छे हैं लेकिन कोई मानें तो .....

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  3. जिंदगी तो सभी को मिलती
    जीवन में कुछ कर लो जी,,,,,बहुत खूब अरुण जी,,,,

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  4. मन से पश्चाताप करो
    प्रायश्चित कर रो लो जी | ... मन को यूँ साफ़ कर लो जी

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  5. सटीक और सुंदर सीख देती हुई प्रस्तुति ...

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  6. बहुत सुन्दर.
    हल्की फुल्की....मगर वज़नदार बात कहती रचना..

    सादर
    अनु

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  7. वाह बेहतरीन खुबसूरत रचना, बधाई स्वीकारें

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  8. जीवन में क्या दिया-लिया
    मन को जरा टटोलो जी ...
    बहुत खूब अरुण जी ... छोटी बहर का कमाल ... सभी शेर लाजवाब .... बधाई ...

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  9. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (09-09-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  10. बहुत ही सुंदर भाव संयोजन अरुण जी,एकदम सटीक और सुंदर सीख देती लाजवाब प्रस्तुति। आभार ....

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  11. आज 09/09/2012 को आपकी यह पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की गयी हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  12. अच्छी सीख देती हुई सीधे सरल शब्दों में ......

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  13. chhote chhote saral shabdon se sajee sundar rachana

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  14. सीधे ,सरल शब्दों में बहुत गहरी बात है इस रचना में..
    बहुत ही बेहतरीन रचना...
    :-)

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  15. This comment has been removed by the author.

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  16. जीवन में क्या दिया-लिया
    मन को जरा टटोलो जी ।

    कितनी सुंदर पंक्तियां हैं !...लाजवाब !
    पूरी रचना बेमिसाल।

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  17. मन को जरा टटोलो जी .......
    स्वर में अमृत घोलो जी
    फिर अधरों को खोलो जी |

    नहीं खर्च कुछ होने का
    मीठा – मीठा बोलो जी |.

    देने वाला कैसे दे ?
    हाथ मलिन हैं धो लो जी |

    मन से पश्चाताप करो
    प्रायश्चित कर रो लो जी |

    नाव सम्हल ना पाएगी
    इतना भी मत डोलो जी |

    मान सहित घर पहुँचा दे
    साथ उसी के हो लो जी |

    जीवन में क्या दिया-लिया
    मन को जरा टटोलो जी |

    अधिक जागरण ठीक नहीं
    चादर तानो सो लो जी |

    दिल को लाख सम्भाला जी ,

    फिर भी दिल मतवाला जी ,

    कल तक मेरा था ,आज ये तेरा हो गया .
    ram ram bhai
    मंगलवार, 11 सितम्बर 2012
    देश की तो अवधारणा ही खत्म कर दी है इस सरकार ने

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  18. बहुत खा लिए कोयले अब ,

    कुछ तो ठंडा हो लो जी .

    वोटों की गिनती छोडो ,

    राज धरम कुछ तौलो जी .

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  19. दिनांक 23/12/2012 को आपकी यह बेहतरीन पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपकी प्रतिक्रिया का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  20. और अंत में...
    स्वर में अमृत घोलो जी
    अधिक जागरण ठीक नहीं
    चादर तानो सो लो जी |

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  21. बहुत प्यारी रचना अरुण जी.

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  22. मन से पश्चाताप करो
    प्रायश्चित कर रो लो जी |

    नाव सम्हल ना पाएगी
    इतना भी मत डोलो जी |

    manbhavan hai rachna Arun ji. http://kpk-vichar.blogspot.im

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