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Sunday, February 24, 2013

पर्यावरण : कुण्डलिया



होता  अति का   अंत है , कह गये सारे संत
एक  सरीखे  रह गये  ,   पतझर और बसंत
पतझर और   बसंत , सभी मौसम हैं घायल
दूषित जल में मौन , हुई  सरिता की पायल
लुप्त  हो   रहे  जीव  ,  बया   गौरैय्या  तोता
सँभल जरा ओ मनुज,अंत है अति का होता ||

         अरुण कुमार निगम
         आदित्य नगर, दुर्ग (छत्तीसगढ़)
         
शम्भूश्री अपार्टमेंट, विजय नगर, जबलपुर (म.प्र.)

14 comments:

  1. आदरणीय गुरुदेव श्री प्रयावरण को समर्पित शानदार कुण्डलिया हेतु हार्दिक बधाई स्वीकारें.

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  2. शानदार प्रेरणा देती कुण्डलियाँ ,आभार
    गुज़ारिश : ''...सपने...???''

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  3. बडी अच्छी क़ुंडलिया है,बधाइ

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  4. prakriti ki vytha aur pida ko ujagar karti sundar rachna

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  5. उत्तम सन्देश देती बहुत ही बेहतरीन कुण्डलियाँ...
    :-)

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  6. बहुत बढ़िया....
    सुन्दर सन्देश लिए कुण्डलियाँ.

    सादर
    अनु

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  7. वाह!
    आपकी यह प्रविष्टि कल दिनांक 25-02-2013 को चर्चामंच-1166 पर लिंक की जा रही है। सादर सूचनार्थ

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  8. वाह!
    आपकी यह प्रविष्टि कल दिनांक 25-02-2013 को चर्चामंच-1166 पर लिंक की जा रही है। सादर सूचनार्थ

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  9. सटीक अभिव्यक्ति ।
    बढिया --
    आभार स्वीकारें ॥

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  10. बहुत सुन्दर ....

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  11. बहुत अच्छा सन्देश मनुज को
    latest postमेरी और उनकी बातें

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  12. वर्तमान में प्रकृति का यही हाल हो रहा है। चिंताजनक विषय पर शानदार कविता प्रस्तुत की है आपने। धन्यवाद।

    नया लेख :- पुण्यतिथि : पं . अमृतलाल नागर

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