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Saturday, February 16, 2013

कुण्डलिया छंद :


चोंच  नुकीली तीक्ष्ण  हैं ,पंजों के नाखून
जो  भी  आये  सामने , कर  दे  खूनाखून
कर दे खूनाखून , बाज  है  बड़ा  शिकारी
गौरैया खरगोश  , कभी बुलबुल की बारी
चोंच सभी की मौन,व्यवस्था ढीली-ढीली
चोंच लड़ाये कौन, बाज की चोंच नुकीली ||


अरुण कुमार निगम
आदित्य नगर, दुर्ग (छत्तीसगढ़)
शम्भूश्री अपार्टमेंट, विजय नगर, जबलपुर (म.प्र.)

32 comments:

  1. तीखा तीखा लिख दिया , जनता है खरगोश
    बाजों से निपटने का , कब आएगा होश ....

    बहुत सुंदर कुंडली

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    1. तीखा तीखा लिख दिया,जनता है खरगोश
      निपटा दें इस बाज को ,कब आएगा होश
      कब आएगा होश , रोष हमको है आता
      काहे समझ न आय,नेह का नाजुक नाता
      कोयल की मधु तान,भूल कर्कशता सीखा
      मिसरी माखन त्याग,बाँटता तीखा तीखा ||

      आदरेया आभार......

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  2. This comment has been removed by the author.

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    1. कीली ढीली हो गई, गोली गोल गुलेल |
      बाज बाज आता नहीं, करे इसी से खेल |
      करे इसी से खेल, चूर मद हो जाएगा |
      है सिद्धांत अपेल, बड़ा कोई आयेगा |
      बढ़ जाता जब जुल्म, मौत तब निश्चय लीली |
      फिर आये ना काम , बाज की चोंच नुकीली ||

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    2. अति का होता अंत है , सोलह आने बात
      बिखराएगी कालिमा , कब तक काली रात
      कब तक काली रात,सुबह का आना तय है
      है असत्य की हार, सत्य की सदा विजय है
      धूप छाँव का खेल, हमेशा रहा नियति का
      सोलह आने बात , अंत होता है अति का ||

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  3. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति का लिंक लिंक-लिक्खाड़ पर है ।।

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  4. बहुत ही नुकीली प्रस्तुति.

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  5. चोच नुकीली काटकर,दे हम नया समाज
    मिलकर हम आगे बढ़े,शुरू करे यह काज

    शुरू करे यह काज,बाज जाये ये करता
    इसके सिवा नाही ,कोइ दूसरा रास्ता

    बहिष्कृत कर समाज,कानून में बड़ी खोच
    तभी बाज की कटे ,कटेगी नुकीली चोच ,,,



    recent post: बसंती रंग छा गया

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    1. मिलकर सब लें ठान तब,कठिन कौन सा काज
      बने कबूतर की तरह ,'धीर' बहिष्कृत बाज
      'धीर' बहिष्कृत बाज , एकता में ताकत है
      पिघल जाय पाषाण , अगर मन में चाहत है
      वीरानों में फूल , महक जाते हैं खिलकर
      कठिन कौन सा काज,ठान लें यदि सब मिलकर ||

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  6. आपकी पोस्ट की चर्चा 17- 02- 2013 के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है कृपया पधारें ।

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  7. बहुत बढ़िया....
    लाजवाब कुंडली...

    सादर
    अनु

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  8. bahut hi sundar aur dhardar prastuti

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  9. नुकीली चोच वाले बाज के होश तो ठिकाने लगाने ही होंगे ! टिप्पणियों में भी जो कुण्डलियाँ हैं उन्हें पढ़ कर आनंद आ गया ! बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति ! आभार !

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  10. ज़माने पर चोट |

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  11. क्या खूब कहा हैं अपने बहुत सुन्दर
    मैं आपके ब्लॉग पर पहली बार आया हूँ आगे निरंतर आता रहूगा
    आप से आशा करता हूँ की आप एक बार मेरे ब्लॉग पर जरुर अपनी हजारी देंगे और
    दिनेश पारीक
    मेरी नई रचना फरियाद
    एक स्वतंत्र स्त्री बनने मैं इतनी देर क्यूँ

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  12. चोंच सभी की मौन,व्यवस्था ढीली-ढीली
    चोंच लड़ाये कौन, बाज की चोंच नुकीली ||


    अब समय आ गया है अब अपनी चोंच नुकीली करें
    सब मिलकर बाज के नुकीली चोंच काट उसे बेकार करें
    latest postअनुभूति : प्रेम,विरह,ईर्षा
    atest post हे माँ वीणा वादिनी शारदे !

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  13. सुन्दर रचना

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  14. मुख्तलिफ खूब सूरत अंदाज़ कहते हैं की निगम अरुण का अंदाज़े ब्यान और ....हैं और भी अरुण कुमार दुनिया में बहुत अच्छे कहतें हैं की अरुण कुमार का अंदाज़े ब्यान और ,तीरे तरकश और निशाना

    कोई

    और

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  15. मुख्तलिफ खूब सूरत अंदाज़ कहते हैं की निगम अरुण का अंदाज़े बयाँ और ....हैं और भी दुनिया में रविकर बहुत अच्छे कहतें हैं ,कहते हैं के अरुण कुमार का अंदाज़े बयाँ और ,तीरे तरकश और

    निशाना

    कोई

    और

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  16. पढ़ कर बिहारी का दोहा याद आ रहा है -बाज पराए पानि परि ,तू पंछीन न मार!

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