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Wednesday, August 1, 2012

मत्तगयंद सवैया


http://api.ning.com/files/GXEpz-asoKXq3VOvX4vX3-0qYw8zbbATKfrWdTJet-00UxKoyvqTAhUlIRjmr5C47AtFIXMGPOqFX9gkoAxlXsGglFrdBrAt/chitra16.jpg 
(ओबीओ से साभार )
सावन पावन है मन भावन , हाय हिया हिचकोलत झूलै
बाँटत बूँदनियाँ बदरी ,बदरा रसिया रस घोरत  झूलै
झाँझर झाँझ बजै  झनकै, झमकै झुमके झकझोरत झूलै
ए सखि आवत लाज मुझे सजना उत् भाव विभोरत झूलै

सावन के पावन अवसर पर ओपन बुक्स ऑन लाइन चित्र से काव्य तक , प्रतियोगिता अंक – 16 में  द्वितीय पुरस्कार प्राप्त रचना .
http://openbooksonline.com/group/pop/forum/topics/5170231:Topic:252152

अरुण कुमार निगम
आदित्य नगर, दुर्ग (छत्तीसगढ़)
शम्भू श्री अपार्ट्मेंट , विजय नगर, जबलपुर (म.प्र.)

18 comments:

  1. बहुत सुन्दर.............
    पुरस्कार की बधाई....
    रक्षाबंधन की शुभकामना स्वीकारें.

    सादर
    अनु

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  2. बहुत सुन्दर रचना..
    पुरस्कार प्राप्ति के लिए बहुत -बहुत बधाई..:-)
    इस पावन पर्व पर आपको ढ़ेर सारी शुभकामनाये :-)

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  3. इतना सुन्दर अनुप्रास और इतनी सहजता से...
    आभार

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  4. उत्कृष्ट प्रस्तुति शुक्रवार के चर्चा मंच पर ।।

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  5. झाँझर झाँझ बजै झनकै, झमकै झुमके झकझोरत झूलै
    ए सखि आवत लाज मुझे सजना उत् भाव विभोरत झूलै,,,,,,

    बहुत बेहतरीन भाव, मनभावन पंक्तियाँ,,,
    पुरस्कार प्राप्ति के लिए बहुत -बहुत बधाई.,,,निगम जी,

    रक्षाबँधन की हार्दिक शुभकामनाए,,,
    RECENT POST ...: रक्षा का बंधन,,,,

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  6. वाह ... बहुत ही बढिया ...

    बधाई सहित अनंत शुभकामनाएं

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  7. कल 03/08/2012 को आपकी यह बेहतरीन पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  8. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    श्रावणी पर्व और रक्षाबन्धन की हार्दिक शुभकामनाएँ!

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  9. बहुत बढ़िया... शुभकामनाएँ...

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  10. बहुत सुंदर!

    पुरुस्कार की बधाई भी स्वीकारें
    बस हमारी एक शंका मिटा दें !!

    सजना अलग और
    सजनी अलग झूले
    में क्यों झूल रहे हैं
    दिखा रहे हैं फोटो आप
    अलग अलग
    पर इस पर मुँह से
    कुछ क्यों ना बोल रहे हैं ?

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  11. बहुत सुंदर ... पुरस्कार के लिए बधाई ....

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  12. पुरस्कार की बधाई....
    बहुत बढ़िया प्रस्तुति..आभार..

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  13. सुंदर रचना! पुरस्कार पाने के लिए हार्दिक बधाई !:)

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  14. बहुत बधाइयाँ आदरणीय अरुण भईया...

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  15. सवैया का आनुप्रासिक माधुर्य लय ताल और भाव समर्पण आवत लाज क्या कहने हैं भाई साहब .

    WEDNESDAY, AUGUST 1, 2012

    मत्तगयंद सवैया

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  16. bahut hi sundar rachna....puraskrat hone hetu badhayi!!

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