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Wednesday, May 29, 2013

क्या लाया ...........




( चित्र गूगल से साभार )
 
सिर्फ  पानी का  बुलबुला  लाया
इस से ज्यादा बता दे क्या लाया |

लूटता   ही   रहा   जमाने   को
नाम   कितना  अरे कमा लाया |

कोसता    है   किसे   बुढ़ापे   में
वक़्त  तूने  ही  खुद  बुरा  लाया |

तू   अकेला   चला    जमाने  से
क्यों नहीं  संग  काफिला  लाया |

लोग कह ना  सके तुझे दिल से
फिर  मिलेंगे  अगर  खुदा  लाया |


अरुण कुमार निगम
आदित्य नगर, दुर्ग (छत्तीसगढ़)
शम्भूश्री अपार्टमेंट ,विजय नगर, जबलपुर (मध्य प्रदेश)

(ओपन बुक्स ऑन लाइन तरही मुशायरा में सम्मिलित दूसरी  गज़ल)

13 comments:

  1. बहत सुंदर आदरणीय अरुण कुमार सर। दिल खुश हो गया। मेरे ब्लॉग पर भी पधारें.........

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  2. बहुत बढ़िया गजल..मेरी नई पोस्ट "जरा अज़मां कर देखिए" ...

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  3. बहुत बढ़िया ग़ज़ल.....

    दाद कबूल करें.

    सादर
    अनु

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  4. आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल गुरुवार (३०-०५-२०१३) को "ब्लॉग प्रसारण-११" पर लिंक की गयी है,कृपया पधारे.वहाँ आपका स्वागत है.

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  5. बहुत बढ़िया प्रस्तुति ..

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  6. कोसता है किसे बुढ़ापे में
    वक़्त तूने ही खुद बुरा लाया |

    बहुत उम्दा,लाजबाब लाजबाब गजल ,

    Recent post: ओ प्यारी लली,

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  7. बहुत सुन्दर ग़ज़ल.

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  8. बहुत ही उम्दा गज़ल अरुण जी ... हार्दिक बधाई!

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  9. कोसता है किसे बुढ़ापे में
    वक़्त तूने ही खुद बुरा लाया |

    ........ लाजबाब गजल अरुण जी

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  10. आदरणीय अरुण जी
    नमस्कार !
    जरूरी कार्यो के ब्लॉगजगत से दूर था
    आप तक बहुत दिनों के बाद आ सका हूँ

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  11. अहा! अति सुन्दर..

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