Followers

Tuesday, January 10, 2012

निगोड़े ध्यान से पढ़ते......( हास्य)



निगोड़े ध्यान से पढ़ते तो चारागर बना लेते
जरा कमजोर रह जाते तो कम्पाउंडर बना लेते.

शरारत खूब करते हैं,ऊधम मस्ती भी करते हैं
ये अच्छा खेलते होते तो तेंदुलकर बना लेते.

ये अपनी बात मनवाने को हाई पिच में चिल्लाते
अगर सुर साधते थोड़ा , इन्हें सिंगर बना लेते.

पसारें पाँव ना ज्यादा, अकल इतनी सी आ जाती
ये अपने बाप की तनख्वाह को चादर बना लेते

शहर की वादियों में रह जरा बिगड़े हैं शहजादे
ये मेहनत गाँव में करते तो अपना घर बना लेते.

(ओ.बी.ओ.तरही मुशायरा में शमिल)

अरुण कुमार निगम
आदित्य नगर , दुर्ग (छत्तीसगढ़)
 विजय नगर , जबलपुर (मध्य प्रदेश)

29 comments:

  1. शहर की वादियों में रह जरा बिगड़े हैं शहजादे
    ये मेहनत गाँव में करते तो अपना घर बना लेते.
    ...sachchiiiiiiiii

    ReplyDelete
  2. रश्मि प्रभा... has left a new comment on your post "निगोड़े ध्यान से पढ़ते......( हास्य)":

    शहर की वादियों में रह जरा बिगड़े हैं शहजादे
    ये मेहनत गाँव में करते तो अपना घर बना लेते.
    ...sachchiiiiiiiii

    ReplyDelete
  3. वाह...
    बहुत सुन्दर..

    ReplyDelete
  4. शहर की वादियों में रह जरा बिगड़े हैं शहजादे
    ये मेहनत गाँव में करते तो अपना घर बना लेते.
    sundar bahut sundar

    ReplyDelete
  5. बहुत ही खूबसूरत प्रस्तुति ||

    ReplyDelete
  6. पसारें पाँव ना ज्यादा, अकल इतनी सी आ जाती
    ये अपने बाप की तनख्वाह को चादर बना लेते

    शहर की वादियों में रह जरा बिगड़े हैं शहजादे
    ये मेहनत गाँव में करते तो अपना घर बना लेते.

    एक -एक पंक्तियाँ सच्चाई को कहती हुई ...

    ReplyDelete
  7. और क्या क्या बना लेते भाई ?

    ReplyDelete
  8. वाह बहुत बढ़िया!
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल बुधवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

    ReplyDelete
  9. हास्य के साथ गंभीर बातें भी उठाई हैं आपने.

    ReplyDelete
  10. बहुत बड़ी बात कह दी आपने मजाक मजाक में । सुन्दर प्रस्तुति ।
    मेरी नई कविता देखें । और ब्लॉग अच्छा लगे तो जरुर फोलो करें ।
    मेरी कविता:मुस्कुराहट तेरी

    ReplyDelete
  11. शहर की वादियों में रह जरा बिगड़े हैं शहजादे
    ये मेहनत गाँव में करते तो अपना घर बना लेते...

    वाह अरुण जी ... बातों ही बातों में क्या बात कह दी ... मज़ा आ गया इस शेर पे ...

    ReplyDelete
  12. मजाकिया अंदाज में गंभीर बातों का बहुत सुंदर चित्रण,....
    बेहतरीन प्रस्तुति.
    welcome to new post --काव्यान्जलि--यह कदंम का पेड़--

    ReplyDelete
  13. वाह!!! सच को कहती सारगर्भित रचना....

    ReplyDelete
  14. **** दिगम्बर नासवा has left a new comment on your post "निगोड़े ध्यान से पढ़ते......( हास्य)":

    शहर की वादियों में रह जरा बिगड़े हैं शहजादे
    ये मेहनत गाँव में करते तो अपना घर बना लेते...

    वाह अरुण जी ... बातों ही बातों में क्या बात कह दी ... मज़ा आ गया इस शेर पे ...

    ReplyDelete
  15. वाह!! बेहतरीन सच्चे उद्गार!!

    ReplyDelete
  16. बहुत बढ़िया प्रस्तुति

    Gyan Darpan
    ..

    ReplyDelete
  17. आपकी पोस्ट आज के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
    कृपया पधारें
    चर्चा मंच-756:चर्चाकार-दिलबाग विर्क

    ReplyDelete
  18. वाह! बहुत बढ़िया लगा! सुन्दर प्रस्तुती!

    ReplyDelete
  19. हास्य की फुहार से लबरेज़
    बहुत सुन्दर काव्य ... !
    हज़ल... पसंद आई !!

    ReplyDelete
  20. शहर की वादियों में रह जरा बिगड़े हैं शहजादे
    ये मेहनत गाँव में करते तो अपना घर बना लेते.very nice.

    ReplyDelete
  21. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति !

    ReplyDelete
  22. बहुत बढ़िया प्रस्तुति ...सुन्दर..

    ReplyDelete
  23. बेहतरीन व्यंग्य सामिजक विद्रूप पर .परिवेश पर .बधाई .आपकी हर रचना खूबसूरत है लगा कई दिनों बाद आया कॉफ़ी कुछ छूत गया .अब क्षति पूर्ती कर रहा हूँ .

    ReplyDelete
  24. हास्य के साथ गंभीर चिंतन .. बहुत अच्छी प्रस्तुति

    ReplyDelete
  25. क्या बात है,अरुण जी.
    वाह ...वाह... वाह...

    ReplyDelete
  26. निगोड़े ध्यान से पढ़ते तो चारागर बना लेते
    जरा कमजोर रह जाते तो कम्पाउंडर बना लेते.

    शरारत खूब करते हैं,ऊधम मस्ती भी करते हैं
    ये अच्छा खेलते होते तो तेंदुलकर बना लेते.
    WAH NIGAM SAHAB BILKUL DHAMAKEDAR PRSTUTI HAI ....BADHAI SWEEKAREN

    ReplyDelete