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Wednesday, March 20, 2013

जल है तो कल है....



(चित्र गूगल से साभार)
 
छंद मरहठा – 10, 8, 11 मात्राओं पर यति देकर कुल 29 मात्रायें | अंत में गुरु, लघु |

जल मलिन न करियो, सदा सुमरियो, बात लीजियो मान |
यह  है गंगाजल  ,  रखियो निर्मल  ,  इसमें  जग के  प्रान ||

जल  है  तो कल है , यदि निर्मल है , इसे अमिय सम जान |
अनमोल  धरोहर  ,  इसमें   ईश्वर  ,  यह   है   ब्रह्म समान ||

अपशिष्ट   बहा  मत व्यर्थ गँवा मत , सँभल अरे नादान |
तेरी     नादानी    ,    मूरख    प्रानी    ,   भुगतेगी  संतान ||

जल  संरक्षित  कर  ,  वृक्ष लगा घर  , कर ले काम महान |
जल वन   बिन भुइयाँ , सारी दुनियाँ ,  बने नहीं शमशान ||

अरुण कुमार निगम
आदित्य नगर, दुर्ग (छत्तीसगढ़)
शम्भूश्री अपार्टमेंट, विजय नगर, जबलपुर (मध्यप्रदेश)

17 comments:

  1. अति सुन्दर आह्वान..

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  2. जल है तो है कल सखे, जल बिन कुल जल जाय |
    कल बढ़ते कल-कल घटे, कल-बल कलकलियाय |
    कल-बल कलकलियाय, खफा कुदरत हो जाती |
    कुल कलई खुल जाय, हकीकत जीवन खाती |
    मनु-जल्पक जा चेत, यही जल तो सम्बल है |
    जलसा है तब तलक, शुद्ध जब तक यह जल है ||

    कल=कल-कारखाना
    कल-बल=दांव-पेंच
    कलकलियाय = क्रोध बढाए
    जल्पक=बकवादी

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  3. सुंदर , अर्थपूर्ण पंक्तियाँ

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  4. सुन्दर सन्देश देती समसामयिक रचना !

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  5. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति का लिंक लिंक-लिक्खाड़ पर है ।। त्वरित टिप्पणियों का ब्लॉग ॥

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  6. प्यारा सन्देश और बहुत ही प्यारे दोहे.

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  7. सार्थक संदेश देती सुन्दर रचना..

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  8. सार्थक संदेश देती बहुत ही सुन्दर और सामयिक रचना.

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  9. दिनांक 21/03/2013 को आपकी यह पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपकी प्रतिक्रिया का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  10. वेद अनुसार : -- "पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि जलमन्नं सुभाषितम"
    अर्थात पृथ्वी में तीन ही रत्न वास्तविक हैं : -- जल, अन्न एवं सुविचार.....

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  11. सुंदर सन्देश sir

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  12. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...आभार!

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  13. आपकी पोस्ट 21 - 03- 2013 के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
    कृपया पधारें ।

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  14. बेह्तरीन अभिव्यक्ति .शुभकामनायें.

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  15. सार्थक संदेश देती रचना

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  16. लाजबाब सार्थक छंद, छंद मरहठा का नाम पहली बार सूना अरुण जी बधाई,,,

    RecentPOST: रंगों के दोहे ,

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  17. अपशिष्ट बहा मत , व्यर्थ गँवा मत , सँभल अरे नादान |
    तेरी नादानी , मूरख प्रानी , भुगतेगी संतान ||

    बहुत सुन्दर ...
    पधारें "चाँद से करती हूँ बातें "

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