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Tuesday, January 15, 2013

मसखरी कर गये.................



ज्योंहि  आये  तबीयत  हरी कर  गये
साँवरी  साँझ  को  मदभरी कर  गये |

रंग   बिखरे   प्रतीची   सँवरती   रही
मेरी  रातों  को  यूँ  बावरी  कर  गये |

क्यारियाँ मस्त होकर महकने लगीं
वृक्ष की शाख को फुलझरी कर गये |

दिल में  बातें बहुत अनकही कैद थी
एक  पल  में  उन्हें  वो  बरी कर गये |

उनकी मुस्कान में था बला का असर
मेरे  गीतों  को  अंत्याक्षरी  कर  गये ||

खो गया दिल मेरा,नींद भी खो गई
भोली सूरत मगर तस्करी कर गये |

आँखों ही आँखों में बातें दो चार की
मन नहीं मानता मसखरी कर गये |

अरुण कुमार निगम
आदित्य नगर,दुर्ग (छत्तीसगढ़)
विजय नगर , जबलपुर (मध्यप्रदेश)