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Saturday, March 17, 2012

कल किये थे हाथ पीले .......


(ओबीओ महाउत्सव में शामिल रचना)

जुड़ गया बिटिया का रिश्ता, दिन सजीले हो गये
नयन  कन्या दान करते ,  क्यों पनीले हो गये.

चहचहाती  चपल  चिड़िया , चंचला चुपचाप  है
यूँ बजी शहनाई  मन में ,  सुर  सुरीले हो गये.

नाज से पाला था जिसको , वो  पराई  हो  रही
माँ – पिता , परिवार के  सपने रंगीले  हो गये.

हैं  नहीं  आसान  राहें, आज  के  परिवेश  में
अब सजन - ससुराल के भी पथ कँटीले हो गये.

देख कर बेटी की हालत ,  नयन  गीले हो गये
कल किये थे हाथ पीले ,  आज  नीले  हो गये.

अरुण कुमार निगम
आदित्य नगर,दुर्ग (छत्तीसगढ़)
विजय नगर, जबलपुर (म.प्र.)

26 comments:

  1. बहुत सुन्दर और मार्मिक रचना...

    देख कर बेटी की हालत , नयन गीले हो गये
    कल किये थे हाथ पीले , आज नीले हो गये.

    दिल को छू गयी...
    सादर.

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  2. बेटी की विदाई के बाद हाथ नीले हो गये--

    कहीं कही तो बेचारा बाप

    कर्ज के बोझ के तले दबकर

    पूरा का पूरा नीला हो जाता है ।

    दर्द ही दर्द --

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  3. देख कर बेटी की हालत नयन गीले हो गये
    कल किये थे हाथ पीले आज नीले हो गये.
    बहुत सुंदर दर्द भरी रचना,अच्छी प्रस्तुति...

    MY RESENT POST ...काव्यान्जलि ...: तब मधुशाला हम जाते है,...

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  4. नाज से पाला था जिसको , वो पराई हो रही
    माँ – पिता , परिवार के सपने रंगीले हो गये... बेटी वाले घर की रौनक हैं ये सपने

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  5. हैं नहीं आसान राहें, आज के परिवेश में
    अब सजन - ससुराल के भी पथ कँटीले हो गये.

    बहुत खूब अरुण जी ... मज़ा आ गया इस काव्यात्मक प्रस्तुति को पड़ के ... बहुत खूब ...

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  6. वाह!!क्या कहने.....बहुत ही बढ़िया भाव संयोजन के साथ यथार्थ का आईना दिखती सार्थक रचना....

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  7. बहुत अच्छी प्रस्तुति!
    इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  8. wah nigam sahab bilkul mamsparshi rachana ......sadar abhar

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  9. बहुत मर्मस्पर्शी रचना...आँखें नम कर गयी...आभार

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  10. चहचहाती चपल चिड़िया , चंचला चुपचाप है
    यूँ बजी शहनाई मन में , सुर सुरीले हो गये.

    कविता का लालित्य मोहक है।

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  11. बहुत सुंदर भाव अभिव्यक्ति,बेहतरीन सार्थक सटीक रचना,......

    MY RESENT POST... फुहार....: रिश्वत लिए वगैर....

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  12. बहुत सुन्दर और मार्मिक रचना

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  13. मर्मस्पर्शी सुन्दर रचना...

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  14. दिल कौ छू गई यह रचना...

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  15. आह ! बेटियां तेरी यही कहानी . मर्म को सहलाती हुई सुन्दर रचना..

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  16. पढ़ गया इक सांस में, सन्नाटा गूंजता खडा
    मानो मन के भाव सब, खाली पतीले हो गए...

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  17. बहुत सुंदर भाव अभिव्यक्ति,बेहतरीन मर्मस्पर्शी सुन्दर रचना.....

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  18. bhut hi sundar nigam sahab bilkul mamshparshi rachana
    नाज से पाला था जिसको , वो पराई हो रही
    माँ – पिता , परिवार के सपने रंगीले हो गये.

    हैं नहीं आसान राहें, आज के परिवेश में
    अब सजन - ससुराल के भी पथ कँटीले हो गये.
    ye panktiyan dil ko chho gayeen

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  19. जुड़ गया बिटिया का रिश्ता, दिन सजीले हो गये
    नयन कन्या दान करते , क्यों पनीले हो गये.mamta beti ke viyog me aankhon ke raste se chalkti hai.

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  20. बहुत सुन्दर रचना...मार्मिक!!

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