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Tuesday, July 16, 2013

क्या बिसात है अपनी


गये   तुरंग  कहाँ  अस्तबल  के  देखते हैं
कहाँ से  आये गधे  हैं निकल के देखते हैं

सभी ने  ओढ़  रखी  खाल शेर की शायद
डरे - डरे से  सभी  दल  बदल  के देखते हैं

वही  तरसते यहाँ  चार  काँधों की खातिर
सभी के  सीने पे जो मूँग दल के देखते हैं

वो   आज   थाल   सजाये   हुये   चले  आये
जिन्हें  हमेशा  बिना नारियल के देखते हैं

बड़ों-बड़ों  में  भला  क्या  बिसात है अपनी
अभी कुछ और करिश्में गज़ल के देखते हैं

अरुण कुमार निगम
आदित्य नगर, दुर्ग (छत्तीसगढ़)
शम्भूश्री अपार्टमेंट, विजय नगर, जबलपुर (मध्य प्रदेश)

(ओपन बुक्स ऑन लाइन तरही मुशायरा,अंक-36 में सम्मिलित  दूसरी गज़ल)

Sunday, July 14, 2013

सूरत बदल के देखते हैं.....


चलो जहान की  सूरत  बदल के देखते हैं
पराई आग में  कुछ रोज  जल के देखते हैं

कहा सुनार ने सोना निखर गया जल के
किसी सुनार के हाथों पिघल के देखते हैं

कभी  कही  न  जुबां से गलत सलत बातें
हरेक  बात  पे   मेरी  उछल  के  देखते  हैं 

अभी  उड़ान  से  वाकिफ  नहीं  हुये  बच्चे
हमारे  नैन  से  सपने  महल के  देखते हैं  

जरा  सबर  तो रखो होश फाख्ता न करो
अभी कुछ और करिश्में गज़ल के देखते हैं 

अरुण कुमार निगम
आदित्य नगर, दुर्ग (छत्तीसगढ़)
शम्भूश्री अपार्टमेंट, विजय नगर, जबलपुर (मध्य प्रदेश)

Friday, July 5, 2013

जन्म दिवस की हार्दिक शुभकामनायें



ज्येष्ठ पुत्र डॉ.चैतन्य निगम को

जन्म दिवस की हार्दिक शुभकामनायें


जीवन हो  खुशियों  भरा , हम दें आशीर्वाद
मिले सफलता  हर कदम , सदा रहो आबाद
सदा रहो आबाद, स्वास्थ्य उत्तम हो हरदम
यही  कामना  आज , हृदय से करते हैं हम
सुख-सुविधा के  फूल , हमेशा महकें आंगन
हम   दें  आशीर्वाद , खुशी  से   झूमे  जीवन ||

Thursday, June 6, 2013

विवाह की इकतीसवीं वर्षगाँठ :



सपना-अरुण निगम (मदिरा सवैया)

ब्याह हुये इकतीस सुहावन साल भये नहिं भान हुआ 
नित्य निरंतर जीवन में पल का पहिया गतिमान हुआ
छाँव कभी अरु धूप कभी हर मौसम एक समान हुआ 
शब्द सधे सुर-ताल सजे यह जीवन मंगल गान हुआ || 

अरुण कुमार निगम
आदित्य नगर, दुर्ग (छत्तीसगढ़) 
06 जून 2013

Wednesday, June 5, 2013

विश्व पर्यावरण दिवस पर ............



(चित्र गूगल से साभार)
 कुण्डलिया छंद

मानव  ने  छेड़ा  इसे  भुगत  रहे   हैं  आज
अब मौसम का देखिए,बिगड़ा हुआ मिजाज
बिगड़ा हुआ मिजाज , संतुलन इसने खोया
कहीं  बरसती  आग  , बाढ़  ने  कहीं डुबोया
झूमा  मद  में  चूर  हाय   बन  बैठा  दानव
दोहन से आ बाज , सँभल जा अब भी मानव ||

अरुण कुमार निगम
आदित्य नगर, दुर्ग (छत्तीसगढ़)
शम्भूश्रीअपार्टमेंट,विजय नगर, जबलपुर (मध्य प्रदेश)