जीवन
के खामोश सफर में, मुझको नींद नहीं आती है
मखमल
रेशम के बिस्तर में, मुझको नींद नहीं आती है.
जीना
सीख लिया तब जाना
कितना
है बेदर्द जमाना
कोई
न जाने साथ निभाना
व्यर्थ
किसी को हृदय बसाना.
रातों
को अब किसी प्रहर में, मुझको नींद नहीं आती है
जीवन
के खामोश सफर में,मुझको नींद नहीं आती है.
सोचा
था , है सफर सुहाना
झूम
रहा था मन मस्ताना
ज्योंहि
लेकिन हुआ रवाना
बाँह
पसारे था वीराना.
प्रेम
नगर के इस खंडहर में,मुझको नींद नहीं आती है
जीवन
के खामोश सफर में,मुझको नींद नहीं आती है.
एक नजर इधर भी सियानी गोठ http://mitanigoth2.blogspot.com
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अरुण कुमार निगम
आदित्य नगर, दुर्ग (छत्तीसगढ़)
विजय
नगर, जबलपुर (म.प्र.)