कमाई का फकत जरिया रहा हूँ
तेरी खातिर बचत खाता रहा हूँ ||
पिलाता ही रहा मैं जाम बन कर
कसम तोड़ी नहीं प्यासा रहा
हूँ ||
बनाये जब मकां तो काट डाला
यहाँ तुलसी का मैं बिरवा रहा हूँ ||
न बाहर घर के कोई बात आई
कभी गूंगा कभी परदा रहा हूँ ||
चला भी आ कभी गुजरे जमाने
तेरी यादों से दिल बहला रहा हूँ ||
अरुण कुमार निगम
आदित्य नगर,दुर्ग (छत्तीसगढ़)
शम्भूश्री अपार्टमेंट,विजय नगर,जबलपुर
(मध्यप्रदेश)
(ओबीओ लाइव तरही मुशायरा में शामिल मेरी दूसरी गज़ल)