पंचतत्व निर्मित काया, अवयवों में मिल जाय
फिर क्यों न इन तत्वों को,रखा सुरक्षित जाय.
वृक्ष न काटो भाईयों , वन जीवन का मूल
इन बिन सारी सृष्टि ही , रेगीस्तानी धूल.
दूषित जल से किस तरह, जीव बुझाए प्यास
जल की रक्षा के लिए , करिए सभी प्रयास.
मान नहीं कीजे अगर , मृदा बाँझ हो जाय
नादानी में ही कहीं , सब कुछ ना खो जाय.
मत जहरीले धूम्र को , तू वायु में डार
बिन वायु के किस तरह, बजें श्वाँस के तार.
अनुशासित जीवन जीयें प्रकृति के अनुकूल
अरुण अभी भी वक़्त है , चलो सुधारें भूल.
अरुण कुमार निगम
आदित्य नगर , दुर्ग ( छत्तीसगढ़ )
विजय नगर , जबलपुर ( मध्य प्रदेश )