(ओबीओ महाउत्सव में शामिल रचना)
जुड़ गया बिटिया का रिश्ता, दिन सजीले हो गये
नयन कन्या दान करते , क्यों पनीले हो गये.
चहचहाती चपल चिड़िया , चंचला चुपचाप है
यूँ बजी शहनाई मन में , सुर सुरीले हो गये.
नाज से पाला था जिसको , वो पराई हो रही
माँ – पिता , परिवार के सपने रंगीले हो गये.
हैं नहीं आसान राहें, आज के परिवेश में
अब सजन - ससुराल के भी पथ कँटीले हो गये.
देख कर बेटी की हालत , नयन गीले हो गये
कल किये थे हाथ पीले , आज नीले हो गये.
अरुण कुमार निगम
आदित्य नगर,दुर्ग (छत्तीसगढ़)
विजय नगर, जबलपुर (म.प्र.)