चलो जहान की सूरत बदल के
देखते हैं
पराई आग में कुछ रोज जल के
देखते हैं
कहा सुनार ने सोना निखर गया
जल के
किसी सुनार के हाथों पिघल के
देखते हैं
कभी कही न जुबां से गलत सलत
बातें
हरेक बात पे मेरी उछल के
देखते हैं
अभी उड़ान से वाकिफ नहीं हुये
बच्चे
हमारे नैन से सपने महल के
देखते हैं
जरा सबर तो रखो होश फाख्ता न
करो
अभी कुछ और करिश्में गज़ल के
देखते हैं
अरुण कुमार निगम
आदित्य नगर, दुर्ग (छत्तीसगढ़)
शम्भूश्री अपार्टमेंट, विजय नगर, जबलपुर (मध्य
प्रदेश)

