मन में इक कसक उठी होगी
इक श्वाँस महक उठी होगी.
इक पल को बहक उठी होगी
कहीं कोयल चहक उठी होगी.
चूड़ी जब खनक उठी होगी
पैजनिया झनक उठी होगी.
थोड़ा सा तुनक उठी होगी
बिजुरी सी चमक उठी होगी.
जिस ओर भी पलक उठी होगी
मेरी सूरत झलक उठी होगी.
बारिश को रोक लिया होगा
इक बूँद तो छलक उठी होगी.
अरुण कुमार निगम
आदित्य नगर
दुर्ग (छत्तीसगढ़)