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Saturday, July 16, 2011

वर्षा ऋतु – एक चित्र ऐसा भी

मेघाच्छदित तृषा अपूर्ण
शून्य नेत्र अश्रु-पूरित
इंद्रधनुषी फिसलन व्यापी
सौदामिनी सहमी-सहमी.

ऋतु की राजनीति अनब्याही
मेघा पिघले , द्रवित धरा
जाने किस पर गाज गिरेगी
ऋतु यामिनी मौन हँसी.

उत्पादन के बीज अंकुरित
अहा ! फसल लहरायेगी
कविताओं का शैशव भी अब
यौवन मांग रहा है.

-अरुण कुमार निगम
आदित्य नगर,दुर्ग
छत्तीसगढ़.

15 comments:

  1. वर्षा के दिनों का बहुत सुन्दर वर्णन किया है आपने ....बेहतरीन रचना

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  2. उत्पादन के बीज अंकुरित
    अहा ! फसल लहरायेगी
    कविताओं का शैशव भी अब
    यौवन मांग रहा है.

    वाह सर.

    कल 17/07/2011 को आपकी एक पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  3. वर्णा ऋतु में वर्षा का वर्णन बहुत सुखद लगा!

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  4. उत्पादन के बीज अंकुरित
    अहा ! फसल लहरायेगी
    कविताओं का शैशव भी अब
    यौवन मांग रहा है.

    बहुत सुन्दर भावाभिव्यक्ति....

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  5. आपकी रचना आज तेताला पर भी है ज़रा इधर भी नज़र घुमाइये
    http://tetalaa.blogspot.com/

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  6. बहुत सुंदर भावपूर्ण वर्षा की अभिवयक्ति...

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  7. वर्णा ऋतु का वर्णन बहुत सुन्दर भावाभिव्यक्ति....

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  8. अस्वस्थता के कारण करीब 20 दिनों से ब्लॉगजगत से दूर था
    आप तक बहुत दिनों के बाद आ सका हूँ,

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  9. कविताओं का शैशव भी अब
    यौवन मांग रहा है.
    क्या बात कही है! बहुत सुंदर कविता।

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  10. वर्षा ऋतु के आगमन पर कहे गए खूबसूरत बोल दिल को बहुत भाये दोस्त |
    सुन्दर रचना |

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  11. varsha ritu ka khoobsurat chitran.khoobsurat shabdon ka chayan.badhaai.

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  12. कविताओं का शैशव भी अब
    यौवन मांग रहा है

    क्या बात है, निगम जी !!
    बिल्कुल नए अंदाज में वर्षा ऋतु का सुंदर चित्रण।

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  13. उत्पादन के बीज अंकुरित
    अहा ! फसल लहरायेगी
    कविताओं का शैशव भी अब
    यौवन मांग रहा है.

    एक परिपक्व रचना है ... यौवन कब आ जाता है कभी कभी खुद को भी पता नहीं चलता ...

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  14. उत्पादन के बीज अंकुरित
    अहा ! फसल लहरायेगी...

    वर्षा ऋतु का सुंदर चित्रण...सुन्दर रचना...

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