सत्यमेव जयते -
सत्य ब्रह्म है सत्य ईश है
, शेष सभी को मिथ्या जान
परम आत्मा चाहे कह लो , या
कह लो इसको भगवान
सतयुग त्रेता द्वापर
कलियुग , जितने भी युग जायें बीत
अटल सत्य था अटल सत्य है सदा सत्य की होती जीत
कभी साँच को आँच नहीं है , सोलह आने सच्ची बात
झूठा सच को साबित कर दे,भला किसी की है औकात
सत्य वचन जो भी कहता है, सदा चले वह सीना तान
नज़र मिलाने से कतराता , झूठ
कहे जो भी इंसान
दिल सच्चा औ’ चेहरा झूठा, मन ही मन
माने इंसान
“झूठ” मुखौटा-दुनियादारी,
“सच” है
बच्चे की मुस्कान
जीते जी तो सकल कर्म कर , चाहे
भोगे भौतिक भोग
“राम
नाम सत् है”कहके
ही ,विदा करें दुनिया से लोग
अरुण कुमार निगम
आदित्य नगर, दुर्ग [छत्तीसगढ़]