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Tuesday, April 30, 2013

अनकहा पैगाम...


अनकहा पैगाम...

बहुरिया के हाथ कच्चा आम है
सास खुश है, अनकहा पैगाम है |

वो समझता ही नहीं संकेत को
क्या कहूँ वो पूरा झण्डू बाम है |

झुनझुने के शोर से चुप हो गया
आम इंसां का यही तो काम है |

काम धंधे से मिली फुरसत हमें
साँझ पूजा , सुबह प्राणायाम है |

छोड़ आए हम जमाने की फिकर
अब कहीं जाकर मिला आराम है  |

अरुण कुमार निगम
आदित्यनगर, दुर्ग (छत्तीसगढ़)
शम्भूश्री अपार्टमेंट, विजय नगर, जबलपुर (मध्यप्रदेश)