अनकहा
पैगाम...
बहुरिया के हाथ कच्चा
आम है
सास खुश है, अनकहा पैगाम है |
वो समझता ही नहीं
संकेत को
क्या कहूँ वो पूरा
झण्डू बाम है |
झुनझुने के शोर से
चुप हो गया
आम इंसां का यही तो
काम है |
काम धंधे से मिली
फुरसत हमें
साँझ पूजा , सुबह प्राणायाम है |
छोड़ आए हम जमाने की
फिकर
अब कहीं जाकर मिला
आराम है |
अरुण कुमार निगम
आदित्यनगर, दुर्ग (छत्तीसगढ़)
शम्भूश्री अपार्टमेंट, विजय नगर, जबलपुर
(मध्यप्रदेश)