मान जाओ प्रिये.....
है मिलन की घड़ी
मत करो हड़बड़ी |
इतनी जल्दी तुम्हें
जाने की क्या पड़ी |
पास बैठो अजी
दूर क्यों हो खड़ी |
देख लूँ मैं जरा
रूप की फुलझड़ी |
छोड़ दो - छोड़ दो
आँसुओं की झड़ी |
हँसके बिखरा भी दो
मोतियों की लड़ी |
वक़्त कम है मगर
ज़िंदगी है बड़ी |
मान जाओ प्रिये
क्यों हो जिद पे अड़ी |
बाँध कर देख लो
प्यार की हथकड़ी |
है महल से हसीं
प्रेम की झोपड़ी ||
अरुण कुमार निगम
आदित्य नगर,दुर्ग (छत्तीसगढ़)
विजय नगर , जबलपुर (मध्यप्रदेश)