Followers

Showing posts with label मौसम के दोहे...मकर संक्रांति. Show all posts
Showing posts with label मौसम के दोहे...मकर संक्रांति. Show all posts

Sunday, January 13, 2013

मकर-संक्रांति पर्व की शुभकामनायें


मौसम के दोहे...

जाने  को  है  शिशिर  ऋतु , आने को ऋतुराज
आग जला कर झूम लें,हम तुम मिलकर आज ||

सूर्य   उत्तरायण   हुए  ,  मकर   संक्रांति पर्व
जन्में   भारत  -  देश  में ,  हमें   बड़ा   है   गर्व ||

मिलजुल कर  रहना  सदा, हर खाई को पाट
मीठा-मीठा बोल कर , सबको तिल गुड़ बाँट ||

सरसों   झूमें   झाँझ   ले  ,  गेहूँ   गाये   गीत
चना  नाचता  मस्त हो ,  तिल तो बाँटे प्रीत ||

मटर  मटकता बावरा  ,  मूंगफली   मुस्काय
मुँह मसूर का खिल उठा, मौसम खूब सुहाय ||

नेह  रेशमी  डोर  फिर , माँझे  का  क्या काम
प्रेम – पतँगिया झूमती ,ज्यों राधा सँग श्याम ||

ऋतु आवत – जावत रहे , पतझर पाछ बसन्त
प्रेम – पत्र कब सूखता ? इसकी आयु अनन्त ||

अरुण कुमार निगम
आदित्य नगर,दुर्ग (छत्तीसगढ़)
विजय नगर , जबलपुर (मध्यप्रदेश)