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Friday, November 2, 2018

अल्पना दिखती नहीं

हिन्दी गजल -

आपसी दुर्भावना है, एकता दिखती नहीं
रूप तो सुन्दर सजे हैं, आत्मा दिखती नहीं।।

घोषणाओं का पुलिंदा, फिर हमें दिखला रहे
हम गरीबों की उन्हें तो, याचना दिखती नहीं।।

हर तरफ भ्रमजाल फैला, है भ्रमित हर आदमी
सिद्ध पुरुषों ने बताई, वह दिशा दिखती नहीं।।

संस्कारों की जमीं पर, उग गई निर्लज्जता
त्याग वाली भावना,करुणा, क्षमा दिखती नहीं।।

कोख में मारी गई हैं, बेटियाँ जब से "अरुण"
द्वार पर पहले सरीखी, अल्पना दिखती नहीं।।

रचनाकार - अरुण कुमार निगम
आदित्य नगर, दुर्ग
छत्तीसगढ़