हरा दुपट्टा , गोरी काया
सबका दिल है इस पर आया.
ना सखि जूही, ना सखि जूली
नाम गँवइहा है मिस – मूली.
नन्हीं नटखट ,बड़ी चरपरी
लेकिन होती, बहुत गुणभरी.
है सुडौल और छरहरी काया
उसने इसका राज बताया.
मूली- नीबू रस पी जाओ
मोटापे को दूर भगाओ.
रस मिश्रण चेहरे पे लगाओ
और कांतिमय चेहरा पाओ.
मूली का रस सिर में लगाना
लीख - जुँओं से छुट्टी पाना.
जो मूली का रस पी जाता
मूत्र सम्बंधी नहीं रोग सताता.
कोई याद करे हरजाई
और तुम्हें गर हिचकी आई.
मित्र जरा भी मत घबराना
मूली के पत्तों को चबाना.
मूली के पत्ते मत फेंको
लवन विटामिन भरे अनेको
सेंधा- नमक लगाकर खायें
मुख-दुर्गंध को दूर भगायें.
मूली में प्रोटीन, कैल्शियम
गंधक ,आयोडीन, सोडियम
लौह तत्व, विटामिन बी,सी
गुण इसके कह गये मनीषी.
पतली वात,पित्त,कफ नाशक
मोटी मूली है त्रिदोष कारक.
विटामिन ‘ए’ का है खजाना
पतली- चरपरी मूली खाना.
इसे सलाद के रूप में खायें
या फिर इसकी सब्जी बनायें
मूली की भाजी है रुचिकर
मूली का रस अति श्रेयस्कर.
गरमागरम मूली के पराठे
शीत ऋतु में मन को भाते.
बहुत चमत्कारी है मूली
मत इसको कहना मामूली.
अरुण कुमार निगम
आदित्य नगर , दुर्ग ( छत्तीसगढ़ )
विजय नगर , जबलपुर ( मध्य प्रदेश )