मुझको तू अपना कर देख
प्रेम-पनीरी खा कर देख
हर दुआ होगी कबूल
बस ! दोनों हाथ उठा कर देख.
मन में क्या है खटक रहा
यहाँ-वहाँ क्यों भटक रहा
‘ना’ में सिर क्यों झटक रहा
‘हाँ’ में शीश हिला कर देख............
बात-बात पर तुनक रहा
खुद अपने से चमक रहा
धन के संग-संग खनक रहा
थोड़ा-बहुत लुटा कर देख.................
लोभ नयन-द्वय झलक रहा
भौतिक सुख को ललक रहा
तन-पिंजरा कब तलक रहा
खुद से नैन मिला कर देख..............
अंत-काल क्यों सिसक रहा
मुझसे मिलने झिझक रहा
तन का दीपक भभक रहा
मन का दीप जला कर देख..................
( गणेश-चतुर्थी की शुभ-कामनायें )
अरुण कुमार निगम
आदित्य नगर ,दुर्ग (छत्तीसगढ़)