Followers

Showing posts with label पगडंडी का राही हूँ मैं. Show all posts
Showing posts with label पगडंडी का राही हूँ मैं. Show all posts

Sunday, September 11, 2011

पगडंडी का राही हूँ मैं

चंदन जैसा नहीं मगर मैं ,
महक छोड़ कर जाऊंगा
ख्वाब सजाना चाहोगे तो
पलक छोड़ कर जाऊंगा.

तुम पर लिखे गीत तुम्हीं को
सौंप रहा हूँ, ओ मनमीता !
इन गीतों में अपनी भी इक
झलक छोड़ कर जाऊंगा.

पंख तुम्हारे – चाह तुम्हारी
जितना चाहो तुम उड़ना
ऐ आजाद परिंदे ! मैं तो
फलक छोड़ कर जाऊंगा.

एक दिये से प्यार किया है
खौफ न खाना अंधियारों से
बुझ जाऊंगा मगर मीत मैं
चमक छोड़ कर जाऊंगा.

काँटे मेरे – फूल तुम्हारे
और धरा क्या बँटवारे में
पगडंडी का राही हूँ मैं
सड़क छोड़ कर जाऊंगा.

अरुण कुमार निगम
आदित्य नगर , दुर्ग
छत्तीसगढ़.