ले के सहारा झूठ का सुल्तान बन गए
ज्यों ताज सिर पे आ गया हैवान बन गए।
आवाम के जज़्बात की तो कद्र ही नहीं
लाठी उठाई हाथ में भगवान बन गए।
सब को बड़ी उम्मीद थी फस्लेबहार की
सपनों के सब्जेबाग़ अब वीरान बन गए।
घर में हमारे आग के शोले भड़क उठे
उनको किया जो इत्तिला नादान बन गए।
किस्मत में तेरी गम लिखा है भोग ले "अरुण"
गदहे भी अब के दौर में विद्वान बन गए।
अरुण कुमार निगम
आदित्य नगर, दुर्ग, छत्तीसगढ़
ज्यों ताज सिर पे आ गया हैवान बन गए।
आवाम के जज़्बात की तो कद्र ही नहीं
लाठी उठाई हाथ में भगवान बन गए।
सब को बड़ी उम्मीद थी फस्लेबहार की
सपनों के सब्जेबाग़ अब वीरान बन गए।
घर में हमारे आग के शोले भड़क उठे
उनको किया जो इत्तिला नादान बन गए।
किस्मत में तेरी गम लिखा है भोग ले "अरुण"
गदहे भी अब के दौर में विद्वान बन गए।
अरुण कुमार निगम
आदित्य नगर, दुर्ग, छत्तीसगढ़