(चित्र गूगल से साभार)
कुण्डलिया छंद :
सुविधा ने सुख छीन कर , बाँट दिया परिवार
बड़ी हुई अट्टालिका
, बंद हो गये द्वार
बंद हो गये
द्वार ,
रखें दीवारें
कटुता
नींव सिसकती मौन , मिटी रिश्तों की मधुता
पसरा हुआ तनाव , निगलती पग-पग दुविधा
क्या सुख का पर्याय,कभी बन सकती सुविधा
?????
अरुण कुमार निगम
आदित्य नगर, दुर्ग़ (छत्तीसगढ़)
शम्भूश्री अपार्टमेंट, विजयनगर, जबलपुर (मध्यप्रदेश)