[दोहा – प्रथम और तृतीय (विषम) चरणों में 13
मात्राएँ. द्वितीय और चतुर्थ (सम) चरणों में
11 मात्राएँ . प्रत्येक दल में 24 मात्राएँ. अंत में एक गुरु ,एक लघु.]
मान और सम्मान की,नहीं कलम को भूख
महक मिटे ना
पुष्प की , चाहे जाये सूख |
अक्षर -अक्षर चुन सदा , शब्द गठरिया बाँध
राह दिखाये व्याकरण ,भाव लकुठिया काँध |
अलंकार रस छंद के , बिना कहाँ रस-धार
बिन प्रवाह कविता कहाँ
गीत बिना गुंजार |
खानपान जीवित
रखे , अधर रचाये
पान
जहाँ डूब कान्हा मिले
, ढूँढू वह रस खान |
दीपक पलभर जल बुझे,नित्य जले आदित्य
ज्योतिर्मय जग को करे,कालजयी साहित्य |
अरुण कुमार निगम
आदित्य नगर , दुर्ग (छत्तीसगढ़)
विजय नगर , जबलपुर (म.प्र.)