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Friday, November 12, 2021

छत्तीसगढ़ी मुक्तक

हमर भाखा ला खा डारिन….


लहू चुहकिन हमर तन के, हमर हाड़ा ला खा डारिन।

हमर जंगल हमर खेती, हमर नदिया ला खा डारिन।

हमीं मन मान के पहुना, उतारेन आरती जिनकर,

उही मन मूड़ मा चघ के, हमर भाषा ला खा डारिन।।


अरुण कुमार निगम

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