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Friday, February 7, 2020

रोज़ डे 07 फरवरी

ROSE DAY पर एक रचना

मेरे गीतों में गुलाबों की महक पाओगे
रोज़ डे तुम तो मनाना ही भूल जाओगे ।

खार की कुछ तो चुभन हाँ ! तुम्हें सहनी होगी
बाद में तुम भी गुलाबों से खिलखिलाओगे ।

साथ पूरब के रहो आसमाँ पे दमकोगे
राह पश्चिम की धरे, तय है डूब जाओगे ।

अरुण कुमार निगम
आदित्य नगर, दुर्ग

(हमारे आँगन का गुलाब)

4 comments:

  1. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज शुक्रवार 07 फरवरी 2020 को साझा की गई है...... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  2. वाह!!!
    क्या बात....
    बहुत सुन्दर

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  3. बहुत बढ़िया गुरुदेव वाहह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्

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