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Saturday, September 24, 2011

उपमेय बने उपमान –


अल्हड़ लहरों में तेरी चंचलता देखी
गंगाजल में तेरी ही पावनता देखी
जो श्रद्धा तेरी पलकों में झाँकी मैंने
हर मंदिर में श्रद्धा की निर्मलता देखी.

जब भी तेरे केशों को सहला देता हूँ
मानों अपने ही मन को बहला देता हूँ
तेरे अधरों को छूने के बाद ही मैंने
कलियों के अंतस्थल में कोमलता देखी.

तेरी धड़कन का जब भी आभास किया है
सरगम पर कुछ रचने का प्रयास किया है
तेरी श्वासों की महकी सी उष्मा पाकर
अरुण रश्मियों में मैंने शीतलता देखी.

मन कहता है तुम ऐसे ही पास रहोगी
छेड़ोगी ऐसे ही और मृदुहास करोगी
भाव बाँच कर तेरे कजरारे नयनों के
कवि-हृदय में ऐसी ही भावुकता देखी.

छलक-छलक जाती हैं मेरी ये पलकें
तुझमें देखी है जबसे अतीत की झलकें
तेरे ज्योतिर्मय मन में जब से डूबा हूँ
तब से हर प्रात: में उज्जवलता देखी.

अपने जीवन से मैं कब का हार चुका था
जीवन की आशाओं को मैं वार चुका था
प्रेमामृत का जब से तूने दान दिया है
अपने ही मृत जीवन में उत्सुकता देखी.

कुंठाओं की देहरी से मैं भाग चुका हूँ
भोर हुई है जीवन की मैं जाग चुका हूँ
अपने को बड़भागी मैंने मान लिया है
तेरे दो नयनों में मैंने ममता देखी.

अरुण कुमार निगम
आदित्य नगर , दुर्ग
छत्तीसगढ़.
(रचना वर्ष- 1980)

18 comments:

  1. इतनी सुन्दर भावाभिव्यक्ति पढने के बाद प्रशंसा करने के लिए शब्द तिरोहित हो गए हैं ...

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  2. कुंठाओं की देहरी से मैं भाग चुका हूँ
    भोर हुई है जीवन की मैं जाग चुका हूँ
    अपने को बड़भागी मैंने मान लिया है
    तेरे दो नयनों में मैंने ममता देखी.
    --
    बहुत सुन्दर प्रणयगीत रचा है आपने!

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  3. वाह ……………मन के कोमल भावो का कितना सुन्दर चित्रण किया है कि मन मे ही उतर गये।

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  4. अपने ही मृत जीवन में उत्सुकता देखी ||

    सुन्दर प्रस्तुति पर बधाई ||

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  5. बहुत भावपूर्ण प्रस्तुति.

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  6. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी की गई है!
    यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

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  7. यह छन्दबद्ध रचना धीरे-धीरे मन के भावों को खोलती चली जाती है।

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  8. बेहतरीन रचना....

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  9. सुन्दर प्रणयगीत .

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  10. अपने ही मृत जीवन में उत्सुकता देखी.
    बहुत ही सुन्दर लिखा है आपने,

    एक बात कहना चाहूँगा, की आप लाल जैसे bright color न उपयोग करें क्योकि ये color आँखों को थोडा सा hurt करते हैं, और जो भी color आपने use किये हैं वो बहुत सुन्दर हैं और बहुत अच्छे हैं.
    शुभकामनाएं
    My Blog: Life is Just a Life
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    .

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  11. तेरी धड़कन का जब भी आभास किया है
    सरगम पर कुछ रचने का प्रयास किया है
    तेरी श्वासों की महकी सी उष्मा पाकर
    अरुण रश्मियों में मैंने शीतलता देखी.

    संयोग शृंगार का अनुपम उदाहरण।
    बहुत अच्छा लिखा है निगम जी।

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  12. जो श्रद्धा तेरी पलकों में झाँकी मैंने
    हर मंदिर में श्रद्धा की निर्मलता देखी.....

    अरुण भाई.... बड़े सुन्दर भाव भरते हैं आप अपनी गीतों में...
    आनंद आ गया...
    सादर...

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  13. बेहतरीन रचना....

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  14. बेहतरीन , लाज़वाब अन्तिम पंक्ति में गीत का निचोड़ बेमिसाल है।

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  15. बहुत सुन्दर गीत लिखा है .....

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  16. एक उत्कृष्ट रचना....

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