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Monday, June 3, 2019

"मैं की बीमारी" - अरुण कुमार निगम

"मैं की बीमारी" - अरुण कुमार निगम

मैं मैं मैं की बीमारी है
खुद का विपणन लाचारी है।

मीठी झील बताता जिसको
देखा चख कर वह खारी है।

पैर कब्र में लटके लेकिन
आत्म-प्रशंसा ही जारी है।

कई बार यह भ्रम भी होता
मनुज नहीं वह अवतारी है।

सभागार में लोग बहुत पर
माइक से उसकी यारी है।

है जुगाड़ मंत्री से उसका
इसीलिए तो दमदारी है।

"अरुण" निकट मत उसके जाना
उसको मैं की बीमारी है।।

- अरुण कुमार निगम
आदित्य नगर, दुर्ग, छत्तीसगढ़

2 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (05-06-2019) को "बोलता है जीवन" (चर्चा अंक- 3357) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    सभी मौमिन भाइयों को ईदुलफित्र की
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. बहुत सुंदर व्यंग रचना।

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