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Sunday, August 5, 2012

फ्रेंडशिप दिवस पर........कुण्डलिया


(1)

 
डूबे मत शिप फ्रेंड की , आओ आज मनायँ
कृष्ण-सुदामा की तरह,मैत्री सभी निभायँ
मैत्री सभी निभायँ , कर्ण को भी मत भूलें
प्रेम त्याग बलिदान , सभी सीमायें  छू लें
सिर्फ स्वार्थ के लिये , न हों मन में मंसूबे
अरुण कहे ‘मत कभी,मित्रता नौका डूबे’ ||

(2)

अंधे लँगड़े की  कथा  ,  आज आ गई याद
मेला दर्शन का  चढ़ा , दोनों  को  उन्माद
दोनों  को  उन्माद , मित्रता  उनमें गहरी
गंगाराम  बिन  नैन  ,   पैर बंशी के बैरी
जुगत लगा कर काँध, बिठा बंशी को गंगा
दोनों  साथी  घूम , लिये  मेला  बहुरंगा ||

(3)
मगरमच्छ अब भी वही ,सुन बंदर नादान
जामुन देना छोड़ दे  ,  मगरमच्छ शैतान
मगरमच्छ शैतान  ,  कलेजा खाने आतुर
मैडम का वह दास, छलेगा तुझको निष्ठुर
नहीं मित्रता इसकी, तुझको रास आयेगी
चालाकी इक रोज, तुझे ही  खा जाएगी ||

(सभी चित्र गूगल से साभार)

अरुण कुमार निगम
आदित्य नगर, दुर्ग (छत्तीसगढ़)
शम्भू श्री अपार्ट्मेंट , विजय नगर, जबलपुर (म.प्र.)