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अनबुझी – सी प्यास है तू.....
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Saturday, September 10, 2011
अनबुझी – सी प्यास है तू.....
उम्र भर की तलाश है तू
तू जमीं
,
आकाश है तू.
मौत तुझसे पूछता हूँ
किसलिये उदास है तू.
बुझ सकी ना ज़िंदगी से
अनबुझी-सी प्यास है तू.
आ तुझे बाँहों में भर लूँ
आज कितने पास है तू.
अरुण कुमार निगम
आदित्य नगर
,
दुर्ग
छत्तीसगढ़.
(रचना वर्ष – 1980)
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