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Tuesday, January 10, 2012

निगोड़े ध्यान से पढ़ते......( हास्य)



निगोड़े ध्यान से पढ़ते तो चारागर बना लेते
जरा कमजोर रह जाते तो कम्पाउंडर बना लेते.

शरारत खूब करते हैं,ऊधम मस्ती भी करते हैं
ये अच्छा खेलते होते तो तेंदुलकर बना लेते.

ये अपनी बात मनवाने को हाई पिच में चिल्लाते
अगर सुर साधते थोड़ा , इन्हें सिंगर बना लेते.

पसारें पाँव ना ज्यादा, अकल इतनी सी आ जाती
ये अपने बाप की तनख्वाह को चादर बना लेते

शहर की वादियों में रह जरा बिगड़े हैं शहजादे
ये मेहनत गाँव में करते तो अपना घर बना लेते.

(ओ.बी.ओ.तरही मुशायरा में शमिल)

अरुण कुमार निगम
आदित्य नगर , दुर्ग (छत्तीसगढ़)
 विजय नगर , जबलपुर (मध्य प्रदेश)

Saturday, January 7, 2012

गज़ल


ये मेहनत गाँव में करते तो अपना घर बना लेते
या  बूढ़े बाप की लाठी को , ताकतवर बना लेते.

इबादत काम की करते औ होता खेत ही मंदिर
कुदाली , हल को अपनी देह का जेवर बना लेते.

अगर  सूखा  पड़ा होता ,  पसीना यूँ बहाते हम
कभी  गेहूँ  बना  देते  , कभी  अरहर  बना लेते.

लुटाते गाँव में खुशियाँ , बहाते प्यार का अमृत
जहर पी -पी के अपने आप को शंकर बना लेते.

सुबह गाते भजन औ रात को कजरी सुनाते हम
अरुण गर शहर ना आते तो अपना घर बना लेते.

("ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" में शामिल)

 

अरुण कुमार निगम
आदित्य नगर , दुर्ग ( छत्तीसगढ़ )
विजय नगर , जबलपुर ( मध्य प्रदेश )

Friday, January 6, 2012

घर......मकान ????


सोचता हूँ
यह घर है या मकान
क्यों हर घड़ी
घुटन-घुटन सी लगती है

मैंने बनाया था
एक बड़ा सा दरवाजा
लगा रखी थी तख्ती
लिखा था जिसपर
जुनूं की जिसको लगी हो
यहाँ चले आये.

बना रखी थी
हवादार बड़ी खिड़कियाँ
कि हवा भी यहाँ आये
तो उसे सुकून मिले.

बना रखी थी छत
कवेलू की
रोशनी भी आये
तो छन-छन कर.

कब, क्यों और कैसे
दीवारें ऊग आई
घर को तब्दील कर दिया
आलीशान मकान में
अंदर तो अंदर
दरवाजे के बाहर भी
खड़ी हो गई दीवारें.

छत भी पक्की हो गई.
भटक गई रोशनी
पलट गई हवा
और मैं बाहर ही रह गया
सोचने के लिए
कि यह 
घर है या मकान.

अरुण कुमार निगम
आदित्य नगर , दुर्ग (छत्तीसगढ़)
विजय नगर , जबलपुर (मध्य-प्रदेश)


Wednesday, January 4, 2012

यही वो तिलस्मी पथ है


यही वो तिलस्मी पथ है
जो जाता तो है
जीवन पर पूर्ण विराम खींचने
मगर लौटता है
जीवन पर प्रश्न चिन्ह लेकर.

यही वो तिलस्मी पथ है
जिस पर जाते हुये
मिलते  हैं
कुछ बिखरे हुये अल्प विराम
कुछ अर्ध विराम के ठूँठ
धूल पर ठहरे हुये
कुछ विस्मयादिबोधक-चिन्ह.

यही वो तिलस्मी पथ है
जिस पर लौटते पथिक की
नियति में लिखा है
फिर से कैद होना
जीवन के कोष्टक में
प्रश्न-चिन्हों के साथ.


गाता राम नाम पथ
अविरल अविराम पथ
शाश्वत मुक्तिधाम पथ
एक पूर्ण विराम पथ.

अरुण कुमार निगम
आदित्य नगर , दुर्ग (छत्तीसगढ़)
विजय नगर , जबलपुर (मध्य-प्रदेश)


Friday, December 30, 2011

तन का भी सम्मान हो.......


आत्मन् !
इस वर्ष माह नवम्बर के अंतिम सप्ताह से “मेथी की भाजी” पर एक बाल गीत लिखा था जिसे आप सभी ने सराहा. सब्जियों के विशेष मौसम ने और आपकी सराहना ने और भी अन्य सब्जियों पर लिखने को प्रेरित किया. माह दिसम्बर में मटर , हरी मिर्च , पालक ,गाजर , टमाटर ,करेला , मूली ,कद्दू , पपीता और मुनगा यानि सहजन पर गीत रचे. इन्हें भी आप सभी का प्यार मिला. इसके पूर्व बाल-गीत पर कभी भी कलम नहीं चली थी , सब्जियाँ भी पहली बार विषय – वस्तु बनी. बहुत अच्छा लगा जब किसी विशेष सब्जी पर लिखने की फरमाइश भी आई. नवीनमणि त्रिपाठी जी के आग्रह पर पपीता लिखी गई. विद्या जी के अनुरोध पर कद्दू और मुनगा (सहजन) की रचना हुई. मनोज कुमार जी ने कहा यदि मैं शिक्षामंत्री होता तो आपकी सारी बाल कवितायें कोर्स में लगवा देता. देता.महेंद्र वर्मा जी और संजय मिश्रा हबीब जी ने भी कहा कि इन्हें पाठ्य पुस्तक में शामिल किया जाना चाहिये. काजल कुमारजी ने कहा कि यह कविता MDH मसालेवाले के हाथ लग गई तो ले उड़ेंगे. वीरुभाई जी की स्पेशल कमेंट्स आये.आये.रेखा जी ने मुनगा / सहजन पर कहा मेरे पति इस सब्जी को घर में लाते ही नहीं थे ,आपने अपनी रचना के माध्यम से उनकी आँखे खोल दी है. रूप चंद्र शास्त्री जी व चंद्र भूषण मिश्र गाफिल जी ने इन्हें चर्चा-मंच प्रदान किया.यशवंत माथुर जी ने नई-पुरानी हलचल में शामिल किया.
इस श्रृंखला को राजकुमारी जी,,रविकर जी, रश्मिप्रभा जी, रंजना जी, अशोक सलूजा जी, सुरेंद्र सिंह झंझट जी, जाट देवता जी, अनामिका जी, सुरेश शर्माजी , चैतन्य शर्मा जी, मोनिका शर्मा जी, माहेश्वरी कनेरी जी,जी,दिगम्बर नासवा जी, बबली जी, धीरेंद्र जी, जेन्नी शबनम जी, सुषमा आहुति जी, अनुपमा पाठक जी, कुश्वंश जी, रचना दीक्षित जी, ऋता शेखर मधु जी, राजेंद्र तेला निरंतर जी, कैलाश शर्मा जी, पल्लवी जी ,घोटू जी, वंदना जी, मनीष सिंह निराला जी, पॉइंट जी, श्री प्रकाश डिमरी जी, राकेश कुमार जी, आशा जी ,संगीता स्वरूप जी , दिव्या श्रीवास्तव जी, ममता बाजपेयी जी, राजीव पंछी जी, अवंति सिंह जी, कुंवर कुसुमेश जी, अतुल श्रीवास्तवजी, नवीन सी. चतुर्वेदी जी,कुमार राधारमण जी, रजनीश तिवारी जी, एस.एन.शुक्ला जी, वंदना गुप्ता जी, मन के मनके जी, शरद कोकास जी, सदा जी, शिखा वार्ष्णेय जी, उड़न तश्तरी जी जैसे ब्लॉगर्स का आशीर्वाद मिला. आप सभी के प्रति हृदय से आभार प्रकट करता हूँ.
इस श्रृंखला के समापन पर स्वास्थ्य के प्रति जागरुकता लाती हुई यह कविता प्रस्तुत है , इसे अपने बच्चों को भी जरूर पढ़ायें. आशा है आपके लिए हितकारी होगी.

मन का अभिनंदन जहाँ हो
तन का भी सम्मान हो
मन को परिभाषित करो तो
तन का भी गुणगान हो.

तन अलग औ मन अलग
ये बात जँचती है कहाँ
बूँद से रह कर विलग
बरसात हँसती है कहाँ

मन जहाँ तन से अलग हो
तन वहाँ निष्प्राण हो.....................

तन जहाँ बंशी बजाये
मन वहाँ गायक बने
मन जहाँ शक्ति समेटे
तन वहाँ नायक बने

तन जहाँ मंदिर सरीखा
मन वहाँ भगवान हो.......................

सिर्फ मन की साधना में
तन को ना दुर्बल करो
और तन को ही सजाने
में ना मन निर्बल करो.

तन हो चंगा, मन हो गंगा
बस यही अरमान हो..........................

स्वस्थ तन में ही निरोगी
मन का होता वास है
तन सुखी, मन भी सुखी तो
जिंदगी मधुमास है.

मन जहाँ मृतप्राय साथी
तन वहाँ श्मशान हो..................................


अरुण कुमार निगम
आदित्य नगर, दुर्ग (छत्तीसगढ़)
विजय नगर , जबलपुर (मध्य प्रदेश)



Sunday, December 25, 2011

मुनगा / सहजन / ड्रम स्टिक

फूल, पत्ती,जड़ और तना
इन अंगों  से  वृक्ष  बना
किसी वृक्ष के फल बेहतर
फूल किसी  पर  हैं सुंदर.

इन सबमें “मुनगा” बेजोड़
कौन  करेगा  इससे होड़.
सभी अंग में  शक्ति भरी
वाह ! प्रकृति की जादूगरी.

फूल , पत्तियाँ  और फली
खाने में  लगती  हैं  भली
जड़ और छाल से बने दवा
गोंद भी  उपयोगी  इसका.

सेवन  में  अति पोषक है
यह जल का भी शोधक है.
सभी  स्वाद  से  पहचाने
कम ही  इसके गुण जाने.

पत्ती  में  है  विटामिन – सी
फाइबर ,आयरन, कैल्शियम भी
खनिज  तत्व  और फास्फोरस
पत्ती   की  भाजी  दिलकश.

पत्ती  का   चूर्ण  चमत्कारी
गर्भवती   ,  प्रसूता   नारी
करे   जो  सेवन   दूध  बढ़े
नई   पीढ़ी   बलवान   गढ़े.

फूल की सब्जी बढ़िया बने
बेसन के संग भजिया छने.
मुनगा  फली की  तरकारी
करें पसंद सब नर – नारी.

सहजन क्या है जान भी लो
इसकी  ताकत मान भी लो
अंडा दूध  से  दूना  प्रोटीन
कौन भला सहजन से हसीन.

दूध से चार गुना  कैल्शियम
केले से तीन गुना पोटैशियम.
विटामिन - सी है सात गुना
नारंगी  से,   अधिक  सुना.

विटामिन ए का अद्भुत स्त्रोत
गाजर से चौगुना  अति होत.
लौह – तत्व पालक से अधिक
मुनगा  कितना  है  पौष्टिक.

कार्बोहाइड्रेट  ,  बी काम्पलेक्स
इसमें है   सब का   समावेश.
बीज से इरेक्टाइल डिस्फन्क्शन
की  दवा   बने,  बढ़े  यौवन.

दक्षिण     अफ्रीका   में  कुपोषण
देख   कहे  विश्व-स्वास्थ्य संगठन
सहजन   इन्हें    खिलाया   जाय
कुपोषण  का    यह  सही  उपाय.

मुनगे  की  चटनी  और  अचार
कई   रोगों   का   है   उपचार
बढ़ा    विदेशों    में    व्यापार
करता   है   निर्यात    “ बिहार “

दूषित  जल  पीकर  मरते   जन
इसका   भी   उपचार है  सहजन
जल - शोधन  की  क्षमता  इसमें
जन – जीवन  की  ममता  इसमें.

हींग , सोंठ, अजवाइन के संग
जड़  का   काढ़ा लाता है रंग
साइटिका  से  मुक्ति  दिलाता
जोड़ों  की  पीड़ा  को  भगाता.

इसका   गोंद   चमत्कारी  है
जोड़ों    का    पीड़ाहारी   है
मुनगा   एक   वायुनाशक  है
पोषक   और   लाभदायक  है.

बड़े   बुजुर्गों  ने  कुछ  मानी
कुछ  विज्ञान  ने  है  पहचानी
यहाँ – वहाँ पढ़ – सुन कर जानी
बात    जरूरी   थी   बतलानी.

मुनगे  की  महिमा  क्या  बतायें
शब्द  बहुत  कम  हैं  पड़  जायें.
कविता  के  गर   सार में  जायें
मुनगा  सहजन   को   अपनायें.

अरुण कुमार निगम
आदित्य नगर , दुर्ग ( छत्तीसगढ़ )
विजय नगर , जबलपुर ( मध्य प्रदेश )
arun.nigam56@gmail.com