(ओबीओ तरही मुशायरा में शामिल)
उमर ढली पर अभी भी दिखते शवाब में
ये काली जुल्फें रँगी हैं जब से खिजाब में.
कवाब, हड्डी, कलेजी, कीमा हर एक दिन
उन्हें यकीं है बड़ा ही यारों जुलाब में.
मिली वसीयत में भारी दौलत नसीब से
समय बिताने पकड़ते मछली तालाब में.
व्ही.आर. लेने की सोचता हूँ मैं इन दिनों
मजा नहीं रह गया जरा भी है जॉब में.
सलाम ठोकूँ क्यों डाकिये को बिना वजह
"मैं जानता हूँ जो वो लिखेंगे जवाब में"
अरुण कुमार निगम
आदित्य नगर,दुर्ग (छत्तीसगढ़)
विजय नगर, जबलपुर (म.प्र.)