ग्यारह
- बारह बाद में , है तेरह का साल
अंकों
ने कैसा किया , देखो आज कमाल
देखो
आज कमाल , दिवस यह अच्छा बीते
आज
किसी के स्वप्न , नहीं रह जायें रीते
दिल
कहता है अरूण, आज तू कुंडलिया कह
है
तेरह का साल , मास- तिथि बारह-ग्यारह ||
अरूण
कुमार निगम
आदित्य
नगर, दुर्ग (छत्तीसगढ़)