मनमीता
रंग-बिरंगे बाजारों में ,मत जाना ;बस छल बिकता है
झांझर,झूमर,चूड़ी,पायल, मायावी काजल बिकता है.
झूठी जगमग,झूठी ज्योति
नकली हीरे,नकली मोती
कागज के फूलों के गजरे
जिनमें खुशबू तनिक न होती.
माहुर,मेहंदी,टिकुली,बिंदिया
झुमका,बाला,कुमकुम डिबिया
सब बिकता है किंतु न बिकती
पल दो पल आँखों की निंदिया.
सब धन-दौलत की चाहत में, जाने क्या –क्या बेच रहे हैं
बंद बोतलों में मनमीता , गंगा जी का जल बिकता है.
बाजूबंद, बिछिया, अंगूठी
करधनिया भी मिले अनूठी
बिना लाज श्रृंगार अगर हो
सारी चीजें लगती झूठी.
लज्जा ,प्रेम ,क्षमा ,मुस्कानें
बाजारों में बिके तो जाने
जो सच्चे गहने पहचाने
वह क्यों छाने व्यर्थ दुकानें.
सब धन-दौलत के व्यापारी , जाने क्या-क्या बेच रहे हैं
मंदिर परिसर में मनमीता, तुलसी-दल, श्रीफल बिकता है.
अरुण कुमार निगम
आदित्य नगर,दुर्ग (छतीसगढ़)
विजय नगर,जबलपुर (मध्य प्रदेश)