1. रंग
दोस्तों को आस्तीनों में पाला है
इस वजह से रंग मेरा काला है.
2.दोस्ती
बात इतनी कहके चारागर गया
दोस्तों ने डस लिया, ये मर गया.
आँख मूँदे , बाँह फैलाए था मैं
पार सीने के मेरे खंजर गया.
मयकदे में दोस्ती के नाम पर
जहर का प्याला मिला,सागर गया.
वो रहें महफूज मौसम से ‘अरुण’
बस इसी कोशिश में मेरा घर गया.
3. रिश्ते
जिन रिश्तों पर नाज बहुत था
उनसे ही शर्मिंदा हूँ
जहरीले धोखे खाकर भी
अब तक कैसे जिंदा हूँ.
गम के मोल में खुशियाँ बेचीं
कुछ बेदाम ही बाँटी थी
बाजारों में चर्चा है कि
किस जग का वासिंदा हूँ.
अरुण कुमार निगम
आदित्य नगर,दुर्ग (छतीसगढ़)
विजय नगर,जबलपुर (मध्य प्रदेश)