मैं क्या था ?
जो हूँ तेरे कारण हूँ.
भाषा है तू
मैं केवल उच्चारण हूँ.
भाव दिये तूने मुझको जब
कवि बना मैं
किरणों का आलोक दिया तब
रवि बना मैं
श्रेष्ठ बनाया तूने
मैं साधारण हूँ.
भाषा है तू
मैं केवल उच्चारण हूँ.
निर्बल था मैं तूने मुझको
सबल बनाया
कीचड़ में पलने वाले को
कमल बनाया
तेरे उत्कट प्रेम का मैं
उदाहरण हूँ.
भाषा है तू
मैं केवल उच्चारण हूँ.
-अरुण कुमार निगम
आदित्य नगर,दुर्ग
(छत्तीसगढ़)
(रचना सन् 1983)