सबका सुख अपना-अपना
मेरे सुख को जाने कौन ?
सब अपने-अपने में खुश हैं
मुझको अपना माने कौन ?
अब ऐसी दुनिया में यारों
जीना क्या, ना जीना क्या ?
सबकी अपनी-अपनी हस्ती
मेरी हस्ती माने कौन ?
वो युग न रहा,दुनियाँ न रही
रिश्तों पर जान लुटाते थे
ऐसे युग में जी के क्या करें
आएगा हमें मनाने कौन ?
ना घर मेरा, ना रिश्ते मेरे
मैं मान करूँ तो कैसे करूँ ?
अपने ही हँसी उड़ाये जब
फिर आए मुझे हँसाने कौन ?
मैंने खुद जला कर रौशन की
जिनकी दुनियाँ - मेरे न हुए
क्यों खुद को ही न राख करूँ
आएगा मुझे जलाने कौन ?
अरुण कुमार निगम
आदित्य नगर,दुर्ग (छतीसगढ़)
विजय नगर,जबलपुर (मध्य प्रदेश)