ना कहने की आदत उसकी भली लगे
शोख शरारत ज्यों मिसरी की डली लगे.
एक आँख में राधा, दूसरी में कान्हा
रास रचाती वृन्दावन की गली लगे.
नजरों से ओझल हो तो लगती खुशबू
नजर जो आये तो जूही की कली लगे.
मक्खन जैसा हृदय , प्रेम गोरस जैसा
गोकुल की ग्वालन, मथुरा की गली लगे.
-अरुण कुमार निगम
आदित्य नगर , दुर्ग (छत्तीसगढ़)