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Tuesday, September 25, 2012

दोहे – हिन्दी


[दोहा – प्रथम और तृतीय (विषम) चरणों में 13 मात्राएँ. द्वितीय और चतुर्थ (सम) चरणों में  11 मात्राएँ . प्रत्येक दल में 24 मात्राएँ. अंत में एक गुरु ,एक लघु.]

हिन्दी भारतवर्ष में ,पाय मातु सम मान
यही हमारी अस्मिता और यही पहचान |

बनी राजमाता मगर ,कर ना पाई राज
माता की  यह बेबसी ,  बेटे  धोखेबाज |

माँ घर में बीमार है  ,  वाह विदेशी प्रेम
बेटा साहब बन गया और बहुरिया मेम |

गिटपिट बोलें आंग्ल में,करते इस पर गर्व
एक दिवस बस साल में ,  मना रहे हैं पर्व |

बालभारती गुम हुई,स्लेट कलम है लुप्त
बाढ़े कैसे बीज अब ,भूमि नहीं उपयुक्त |

देवनागरी लिपि सरल , पढ़ने में आसान
लिपि उच्चारण एक है ,हिन्दी बड़ी महान |

आंग्ल-प्रेम बढ़ता रहा,निज-भाषा रहि हेय
हिन्दी  ही  पहचान  है , रखिये  इसे  अजेय |


अरुण कुमार निगम
आदित्य नगर , दुर्ग (छत्तीसगढ़)
विजय नगर , जबलपुर (म.प्र.)