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Tuesday, May 7, 2019

दुमदार दोहे -

(1)
शरशय्या पर आम-जन, अर्जुन अंतिम आस।
धरती से धारा बहे, तभी बुझेगी प्यास।।
ढूँढते फिरते संजय।
दिखें ना उन्हें धनंजय।।

(2)
दुर्योधन दिखते कई, दुःशासन के साथ।
राजा श्री धृतराष्ट्र का, उनके सिर पर हाथ।।
सत्य, द्रोही कहलाए।
झूठ नित तमगे पाए।।

अरुण कुमार निगम
आदित्य नगर, दुर्ग, छत्तीसगढ़

Friday, April 26, 2019

दुमदार दोहे -

दुमदार दोहे -

गर्मी का मौसम रहे, सिर पर रहे चुनाव।
अल्लू-खल्लू भी अकड़, गजब दिखाएँ ताव।।
राज आपस के खोलें
वचन सब कड़ुवे बोलें।।1।।

मंचों के भाषण लगें, ज्यों लू-झोंके गर्म।
इनकी गर्मी देखकर, ऋतु को आई शर्म।।
अजेंडा चुगली-चारी
भीड़ भाड़े की भारी।।2।।

अरुण कुमार निगम
आदित्य नगर, दुर्ग
छत्तीसगढ़