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Tuesday, July 8, 2014

गज़ल : सोच बदलेगी न जब तक.........



सोच बदलेगी न जब तक.........

संस्कारों की  कमी से , मनचले होते रहेंगे
कुछ न बदलेगा जहां में , हादसे होते रहेंगे.

दोष इसका दोष उसका मूल बातें गौण सारी
तालियाँ जब तक बजेंगी , चोंचले होते रहेंगे 

मौन धरने उग्र रैली , जल बुझेगी मोमबत्ती
आड़ में कुछ बाड़ में कुछ सामने होते रहेंगे
 
आबकारी  लाभकारी  लाडला सुत है कमाऊ
और  भी  तो  रास्ते हैं , फायदे होते रहेंगे 

ये गवाही वो गवाही, है बहुत ही चाल धीमी 
जानता है  हर दरिंदा  , फैसले होते रहेंगे

अश्क हैं घड़ियाल जैसे दाँत हाथी की तरह दो
रंग गिरगिट सा बदलते वो हरे होते रहेंगे 

ठोस दावे ठोस वादे, ढोल-सी आवाज इनकी
सोच बदलेगी न जब तक,खोखले होते रहेंगे

अरुण कुमार निगम
आदित्य नगर, दुर्ग (छत्तीसगढ़)