ये माना चाल में धीमा रहा हूँ
मगर जीता वही कछुवा रहा हूँ
बुझाई प्यास कंकर डाल मैंने
तेरे बचपन का वो कौवा रहा हूँ
कभी बख्शी थी मेरी जान उसने
छुड़ाया शेर को,चूहा रहा हूँ
कुँये में शेर को फुसला के लाया
बचाई जान वो खरहा रहा हूँ
मेरे बचपन न फिर तू आ सकेगा
तेरी यादों से दिल बहला रहा हूँ
अरुण कुमार निगम
आदित्य नगर,दुर्ग (छत्तीसगढ़)
शम्भूश्री अपार्टमेंट,विजय नगर,जबलपुर
(मध्यप्रदेश)