मृत्यु सुंदरी ब्याह करोगी ?
गीत मेरे सुन वाह करोगी ?
सुख- दु:ख की आपाधापी ने,
रात-दिवस है खूब छकाया
जीवन के संग रहा खेलता,
प्रणय निवेदन कर ना पाया
क्या जीवन से डाह करोगी ?
कब आया अपनी इच्छा से,फिर
जाने का क्या मनचीता
काल-चक्र कब मेरे बस में,
कौन भला है इससे जीता
अब मुझसे क्या चाह करोगी ?
श्वेत श्याम रतनार दृगों
में, श्वेत पुतलियाँ हैं एकाकी
काले कुंतल श्वेत हो गए,
सिर्फ झुर्रियाँ तन पर बाकी
क्या इनको फिर स्याह करोगी ?
आते-जाते जल-घट घूंघट, कब
पनघट ने प्यास बुझाई
स्वप्न-पुष्प की झरी
पाँखुरी, मरघट ही अंतिम सच्चाई
अंतिम क्षण, निर्वाह करोगी ?
अरुण कुमार निगम
आदित्य नगर, दुर्ग
(छत्तीसगढ़)