- कुण्डलिया छंद -
चम-चम चमके गागरी,चिल-चिल चिलके धूप
नीर भरन की चाह में , झुलसा जाये रूप
झुलसा जाये रूप , कहाँ से लाये पानी
सूखे जल के स्त्रोत , नजर आती वीरानी
दोहन – अपव्यय देख , रूठता जाता मौसम
धरती ना बन जाय , गागरी रीती चम-चम ||अरुण कुमार निगम
अदित्य नगर, दुर्ग (छत्तीसगढ़)
शम्भूश्री अपार्टमेंट,विजय नगर,जबलपुर(मध्यप्रदेश)
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Monday, May 20, 2013
कुण्डलिया छंद -
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