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Monday, May 20, 2013

कुण्डलिया छंद -

             


कुण्डलिया छंद -

चम-चम चमके गागरी,चिल-चिल चिलके धूप
नीर   भरन  की  चाह  में  ,   झुलसा  जाये  रूप
झुलसा   जाये   रूप   ,   कहाँ   से   लाये   पानी
सूखे   जल   के   स्त्रोत , नजर   आती   वीरानी
दोहन – अपव्यय  देख , रूठता   जाता  मौसम
धरती  ना  बन  जाय , गागरी  रीती  चम-चम ||

अरुण कुमार निगम
अदित्य नगर, दुर्ग (छत्तीसगढ़)
शम्भूश्री अपार्टमेंट,विजय नगर,जबलपुर(मध्यप्रदेश)